BHU : आयुर्वेद से सम्भव है पैंक्रियाटाईटिस की चिकित्सा, वैद्य बालेन्‍दु प्रकाश ने पेश किया अध्‍ययन

नारस। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय के रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के सौजन्य से शनिवार को पदमश्री वैद्य बालेन्दु प्रकाश का पैंक्रियाटाईटिस की आदर्श आयुर्वेदीय चिकित्सा विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया।

वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने 620 मरीजों का सम्पूर्ण अध्ययन प्रस्तुत किया, जिसमे उन्होंने पैंक्रियाटाईटिस की चिकित्सा आयुर्वेदीय रसौषधियो और आहार पर नियन्त्रण करके किया है। अपने उद्बोधन में आपने कहा कि वो पैंक्रियाटाईटिस का निदान आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मापदंडो पर निर्धारित कर मरीजो की आयुर्वेदीय चिकित्सा करते हैं। उनकी औषधि में ताम्र भस्म एवं अन्य वनस्पति का प्रयोग किया गया है।

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उन्‍होंने बताया कि पैंक्रियाटाईटिस एक लाइलाज बीमारी है, जिसकी चिकित्सा आधुनिक चिकित्सा शास्त्र से पूर्ण रूपेण सम्भव नहीं है। इस बीमारी में मरीज को पेट के मध्य में भयंकर दर्द होता है। यह बीमारी क्यों होती है यह भी अबतक पता नहीं चल सका है।

किन्तु उन्होंने आयुर्वेदीय औषधियों से इस बीमारी के मरीजो को पूर्ण लाभ प्रदान किया है। वैद्य बालेन्दु प्रकाश का कहना है कि नियंत्रित आहार तीन बार, पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विश्राम से एवं उनकी औषधि अमर, नारिकेल लवण, रसोंन वटी आदि मरीज की विशिष्ट प्रकृति के अनुसार पित्त शामक औषधियों का प्रयोग कर पैंक्रियाटाईटिस को नियन्त्रित किया जा सकता है।

वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने अपने द्वारा विकसित औषधि अमर की वैज्ञानिक विश्लेषण सरंचना, प्रायोगिक परीक्षण की विधियों से भी छात्रों को अवगत कराया।

विद्यार्थियों को उत्साहित करते हुये वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने कहा कि छात्रों को पुरुषार्थ करना चाहिये, यदि आप साधना शुरू करेंगे तो साधन अपने आप बनते जायेंगे। वैद्य बालेन्दु प्रकाश स्वयं एक पड़ाव नामक आयुर्वेदीय श्रृखला के चिकित्सालय का संचालन करते हैं।

व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुये प्रोफेसर आनन्द चोधरी ने कहा कि निरन्तर चार वर्षो से मेडिसिन के नोबल पुरूस्कार उन सिद्धांतो पर मिल रहे हैं जो आयुर्वेद में वर्णित है किन्तु भारतीय वैज्ञानिक उन पर शोध नहीं करते हैं, अतः हम नोबल पुरुस्कारों से दूर हैं।

प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने कहा कि मूलरूप से आयुर्वेदीय चिकित्सा सिद्धांत एवं शास्त्रीय विधि से निर्मित आयुर्वेदीय औषधियों से की गयी चिकित्सा पूर्ण रूप से सफल होती है। मरीज आयुर्वेद के अनुरूप दिन चर्या, ऋतुचर्या एवं सम्‍यक आहार का सेवन करें तो चिकित्सा शत प्रतिशत सफल होती है।

व्याख्यान के पश्चात वैद्य बालेन्दु प्रकाश के द्वारा पैंक्रियाटाईटिस के आयुर्वेदीय चिकित्सा सिधान्त की पुस्तक बीऐएम्एस के विभिन्न वर्षो के विद्यार्थी प्रतिनिधि को वितरित की गयी।

व्याख्यान में भारी संख्या में छात्र छात्राये उपस्थित थे। शिक्षको में प्रो एस के मिश्र, प्रो नीरज कुमार, प्रो मनोज कुमार, डॉ शोभा भट्ट, डॉ लक्ष्मी नारायण गुप्ता, डॉ ममता तिवारी, डॉ रिन जिंग लेमो आदि उपस्थित थे। छात्रों में विशेष सहयोग डॉ शक्ति भूषण, डॉ आशुतोष पांडे, डॉ विनीत शर्मा, डॉ शोभा कटारा, डॉ सौम्या, डॉ यशिका, डॉ सुमित्रा आदि का रहा।

अतिथियों का स्वागत डॉ चन्द्र शेखर, व्याख्याता अतिथि का परिचय डॉ वन्दना मीणा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ गुरु प्रसाद तथा संचालन डॉ सुकृत ने किया।

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