धर्म की नगरी काशी में स्थापित हुआ ‘भोजपुरी माई’ का मंदिर, मारीशस के हाई कमिश्नर ने किया उद्घाटन

नारस। धर्म और संस्कृति कीराजधानी काशी में शुक्रवार को एक नया अध्याय लिखा गया। शहर के बड़ालालपुर स्थित जीवनदीप पब्लिक स्कूल में ‘भोजपुरी माई’ के पहले मंदिर का विधिव उद्घाटन हुआ। देश के इस पहले मंदिर का उद्घाटन करने के लिए मारीशस के हाई कमिश्नर ने किया। इस मौके पर हाई कमिश्नर जगदीश्वर गोवर्धन ने कहा कि वाराणसी में प्रस्तावित प्रवासी भारतीय भवन में भोजपुरी माई की भव्य और विशालकाय प्रतिमा की स्थापना होगी।

मारीशस में भारत की ही तरह भोजपुरी भाषा बोली जाती है और मारीशस के बाद भारत में वाराणसी पहला ऐसा शहर बन गया है जहां भोजपुरी माई का मंदिर स्थापित हुआ है।

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भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के अभियान के तहत प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में एक नई इबारत लिख दी गयी जब बड़ा लालपुर स्थित जीवनदीप पब्लिक स्कूल में देश का पहला भोजपुरी माई का मंदिर स्थापित किया गया। दस फिर ऊँचे मंदिर में चार फुट की भोजपुरी माई की प्रतिमा का अनावरण मारीशस के हाई कमिश्नर जगदीश्वर गोवर्धन ने किया। उन्होंने कहा कि काफी समय पहले देखा गया सपना देव भूमि काशी में आकर समाप्त हुआ है।

इस दौरान मारीशस के हाई कमिश्नर ने बताया कि बाबतपुर में प्रस्तावित प्रवासी भारतीय भवन में हम भोजपुरी माता का भव्य मंदिर बनायेंगे। इसमें 108 फुट ऊँची भोजपुरी माता की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।प्रवासी भवन में तमाम सुविधाएं उपलब्‍ध होने से विदेशों में बसे अपने लोग भारत आकर शिक्षा के साथ विभिन्‍न विषयों पसर शोध कर सकेंगे। इस मौके पर विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन के संयोजक डा. अशोक सिंह ने कहा कि मंदिर की स्‍थापना से भोजपुरी भाषा को सम्‍मान दिलाने के लिए बड़े जनांदोलन की शुरुआत वाराणसी से हो गई है।

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