नारस। गंगा विहार के लिए सैलानी अक्टूबर से फरवरी माह तक बहुत अधिक संख्या में आते हैं। इस समय प्रवासी पक्षियों का कलरव गंगा और गंगा के घाटों की छटा में चार चांद लगता है। अगले साल जनवरी माह में होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस से पहले किसी भी खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाह रही हैं। इसी क्रम में गंगा में नावों को लेकर भी प्रशासन सतर्क हुआ है और यहां रहने वाली नावों की कोडिंग शुरू कर दी गयी है।

सुरक्षा अधिकारियों की माने तो यह कोडिंग इसलिए की जा रही ताकि कसी भी अप्रिय घटना के समय नाव और उसके मालिक की पहचान हो सके साथ ही यदि कोई बाहरी नाव गंगा में प्रवेश करे तो उसकी शिनाख्त हो सके। गौरतलब है कि गंगा में एक हज़ार से अधिक छोटी बड़ी नावें चलती हैं।

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प्रवासी भारतीय दिवस सम्मलेन के दौरान काशी में कोई भी बाहरी नाव गंगा की लहरों पर नहीं आ सकेगी। इसके लिए स्थानीय नावों के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारी कर ली है। स्थानीय नावों का डाटा एकत्रित कर उनकी कोडिंग की जा रही है। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियां गंगा में चलने वाली सभी छोटी बड़ी नावों का डाटा एकत्र कर रहे हैं साथ ही मालिक का नाम और किस घाट पर किसकी नाव चलती यह सारी लिस्ट तैयार की जा रही है।

स्थानीय प्रशासन सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज़ से है नाव को एक यूनिक कोड देगी ताकि किसी भी दुर्घटना के समय नाव और उसके मालिक की पहचान हो सके साथ ही किसी नयी नाव के काशी के गंगा क्षेत्र में रवेश करने पर उसे चिह्नित किया जा सके।

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