गंगा सेवा निधि ने दशाश्वमेध घाट पर किया भंडारे का आयोजन, 26 वर्षों से जारी है ये परंपरा

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नारस। भोले की नगरी काशी में मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से कोई भी भूखा नहीं रहता। यहां निरंतर कहीं ना कहीं भूखे और गरीबों को भोजन की व्‍यवस्‍था होती रहती है। इसी क्रम में दशाश्‍वमेध घाट पर प्रतिदिन सुबह शाम गंगा आरती कराने वाली गंगा सेवा निधि ने भंडारे का आयोजन किया। जिसमें सैकड़ों की संख्‍या में विभिन्‍न वर्गों के लोगों ने भोजन-प्रसाद ग्रहण किया।

काशी में देश के विभिन्न कोने से आए श्रद्धालु अपने पापों को हरने के लिए मंदिरों में मत्था टेकते है, व मोक्ष दायिनी मां गंगा में डुबकी लगाते हैं। अर्ध चंद्राकर 84 घाटों में बंटे मोक्षदायनी गंगा के खूबसूरत घाटों में से सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की ओर से पिछले 26 वर्षों से हर साल भंडारे का आयोजन किया जाता है।

इस अवसर पर गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि इस भंडारे का शुरुआत हमारे पिता स्वर्गीय सतेंद्र मिश्रा ने 1993 से किया था। इसके बाद उनके द्वारा चालू किये गए इस पुनीत कार्य को हम सभी गंगा सेवा निधि के सदस्य करते आ रहे हैं।