तस्‍वीरों में देखें, वाराणसी में कैसे किया गया 2019 का स्‍वागत

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नारस। कैलेंडर वर्ष 2018 बीत चुका है और 2019 का आगाज हो गया है। इस साल के पहले दिन यानी मंगलवार को गलन और ठण्ड ने सुबह से ही शहर को अपनी आगोश में ले रखा था। इस ठण्ड और शीतलहरी के बीच वाराणसी के अल्लहड़ मिजाज़ियों की नववर्ष की उमंग भारी पड़ गयी।

वहीं 31 दिसम्‍बर 2018 की रात से ही शहर का माहौल मस्‍तीभरा हो चुका था। न्‍यू ईयर का जश्‍न मनाने के लिये वाराणसी के सभी बडे होटल, बैंक्‍वेट हॉल आदि पहले से ही बुक रहे। वहीं लोगों ने अपने घरों की छत आदि पर भी नाचते गाते नये कैलेंडर साल का स्‍वागत किया।

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नववर्ष की मस्ती में डूबा युवा वर्ग शहर के पर्यटन स्थलों सारनाथ, गंगा घाट, शूलटंकेश्‍वर, रामनगर किला आदि घूमते देखे गए। समूह में पहुंचे युवा नववर्ष की उमंग और मस्ती में डूबे दिखे। सभी एक दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देने में लगे थे।

मंदिरों में भी उमड़े युवा
नववर्ष के पहले दिन मंगलवार को बाबा विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा के साथ कालभैरव और श्री संकट मोचन दरबार युवाओं से पटा रहा। इस दौरान काशी के कोतवाल कालभैरव, बाबा विश्वनाथ के साथ संकटमोचन के प्रति युवाओं की श्रद्धा गंगा की मौजों की तरह उफान मारती रही। नये साल का गर्मजोशी से स्वागत के साथ जीवन में सफलता की नई उम्मीद, नई शुरूआत के लिए युवा बाबा और भगवती अन्नपूर्णा के आर्शिवाद के लिए लम्बी लाइन में लगे रहे। दर्शन पूजन के बाद युवाओं ने जमकर मस्ती की। सारनाथ, गंगा तट,गंगा उस पार रेती में, अस्सीघाट पर युवा बच्चे दिन भर मौज मस्ती करते रहे।

नाव वालों की हड़ताल का नहीं दिखा असर
पिछले कई दिनों से क्रूज़ का विरोध कर रहे माझी समाज ने नावों की हड़ताल कर रखी है। ऐसे में नववर्ष फीका होने का आसार था पर युवाओं ने गंगा घाट पर नववर्ष को समारोह की तरह मानकर यह जता दिया की काशी में मस्ती और उल्लास कभी ख़त्म नहीं हो सकता चाहे कितना भी विरोध प्रदर्शन क्यों न हो।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की छात्र मानसी ने बताया कि हम लोगों ने कई दिनों पहले ही आज के दिन बोटिंग का प्लान बनाया था, पर यहां आकर पता चला की नाव नहीं चलेगी। इसपर हमें निराशा हुई तो लेकिन अब हम घाट किनारे ही नये वर्ष की पिकनिक मनाएंगे।

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