‘रामलला टेंट में हैं तो सांसद जी आप भी टेंट में रहिये’, लिखकर BHU के छात्रों ने PMO भेजा तिरपाल

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नारस। राम मंदिर का मुद्दा अब सियासी गलियारों से होता हुआ अब शिक्षण संस्थाओं तक पहुँच गया है। गुरूवार को राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के एक छात्र समूह ने विश्वविद्यालय के डाकघर से प्रधानमंत्री कार्यालय नई दिल्ली के लिए एक तिरपाल भेजा और कहा कि जब तक रामलला टेंट में हैं तब तक आप भी टेंट में रहिए।

छात्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा एक न्यूज़ एजेंसी को दिए गए बयान कि सरकार न्याय प्रक्रिया का इंतज़ार करेगी से हम आहत हैं और राम मंदिर निर्माण को एक बार फिर झटका लगा है।

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चुनाव के पहले हर बार की तरह इस बार भी राम मंदिर सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। क्या महंत, क्या राजनेता अब इस मुद्दे को छात्रों ने भी हवा देनी शुरू कर दी है। पूरब का आक्सफोर्ड कहे जाने वाले काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में राम मंदिर के निर्माण को लेकर गुरूवार को सियासी नारे बलंद हुए और नारेबाजी करता हुआ छात्रा समूह विश्वविद्यालय के डाकखाने पहुँच गया। डाकखाने में छात्रों प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए 68 रूपये के स्पीड पोस्ट से एक तिरपाल पोस्ट किया है।

इस सम्बन्ध में विश्वविद्यालय के छात्र पतंजलि ने बताया कि लगातार हिन्दू समाज की मांग है कि अयोध्या में रामजन्म भूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो। इसके लिए दो रस्ते थे एक न्यायालय का और एक संसद का। पतंजलि ने कहा कि न्यायलय में अब इतना विलम्ब हो राह है कि हिन्दू समाज की सहन करने की शक्ति खत्म हो गयी है। हिन्दू समाज लगातार यह मांग करता आया है कि सरकार संसद में कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण करे पर ऐसा भी होता नहीं दिखाई दे रहा है।

पतंजली ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक न्यूज़ एजेंसी को दीए बयान में कहा है कि सरकार कानून नहीं लाएगी और न्याय प्रक्रिया का इंतज़ार करेगी। तो अब हम विलम्ब सहने के लिए तैयार नहीं हैं इसलिए आज हमने प्रधानमंत्री जी को टेंट भेजा है और आगे हम भाजपा के हर विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री को और हर पार्टी के अध्यक्ष को हम तिरपाल भेजकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

छात्रों ने कहा कि सभी सांसद, विधायक, मंत्री सरकारी बंगले में रहते हैं और जिनके बल वो सत्ता में आए रामलला वो टेंट में हैं, इसलिए हम ये कार्य अब लगातार करते रहनेगे और लोगों को तिरपाल भेजते रहंगे।

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