नारस। शहर बनारस के साबिक़ इमामे जुमा, मरहूम अल्हाज मौलाना सैयद अहमद हसन साहब क़िब्ला ताबासराह (आले जव्वाद उल उलेमा) की छठवीं मजलिसे बरसी शिया जामा मस्जिद दारानगर में आयोजित हुई। मजलिस में इमाम हुसैन की तालीम और क़ुरबानी के साये में मौलाना मौसूफ़ की ख़िदमात को याद किया गया कि किस तरह से मौलाना मौसूफ़ ने अपने किरदार के ज़रिए लोगों के दिलों में एक अलग जगह बना ली थी। मजलिस का आग़ाज़ तिलावते कलाम पाक से हुआ।

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सोज़ख़्वानी के फ़राएज़ जनाब कासिम अली जानी साहब व हमनवां ने अंजाम दिया। जनाब अतश बनारसी साहब, जनाब दिलकश ग़ाज़ीपुरी साहब, जनाब रिज़वान बनारसी साहब, जनाब डॉक्टर महमूद मोहम्मदाबादी साहब, जनाब प्रोफेसर अज़ीज़ हैदर साहब ने पेशख़्वानी के ज़रिए खिराजे अक़ीदत पेश किया।

मजलिस को आली जनाब मौलाना उरूज उल हसन मीसम साहब क़िब्ला (लखनऊ) ने ख़िताब किया। नौहा व मातम अंजुमन ए हुसैनिया ने अंजाम दिया। निज़ामत का फ़रीज़ा मौलाना ज़हीन हैदर दिलकश ग़ाज़ीपुरी साहब ने अंजाम दिया।

मजलिस में शामिल लोगों में मौलाना ज़मीर उल हसन साहब क़िब्ला, मौलाना क़ैसर नजफी सहाब क़िब्ला, जनाब आलिम हुसैन रिज़वी साहब, मौलाना अमीन हैदर हुसैनी सहाब क़िब्ला, मौलाना कैफ़ी साहब क़िब्ला, मौलाना वसीम उल हुसैनी साहब क़िब्ला के साथ साथ शहर बनारस के सैकड़ों मोमेनीन शामिल हुए। मजलिस में आये तमाम लोगों का खानवाद ए आले जव्वाद उल उलेमा ने शुक्रिया अदा किया।

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