उपलब्‍धि : DLW में बने 100वें विद्युत रेल इंजन ‘WAP-7 शतक’ का हुआ लोकार्पण

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नारस। डीजल रेल इंजन बनाने में पूरे विश्व में प्रसिद्ध वाराणसी के डीएलडब्‍ल्‍यू को इस साल के शुरुआत में ही बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। डीजल रेल इंजन के अलावा बिजली से चलने वाले रेल इंजन बनाने की दिशा में भी डीएलडब्‍ल्‍यू तेजी से कदम बढ़ाते हुए नये कीर्तिमान स्‍थापित कर रहा है।

राष्‍ट्र को समर्पित हुआ 100वां विद्युत रेल इंजन
इसी क्रम में सोमवार को डीरेका द्वारा निर्मित 100 वें विद्युत रेल इंजन डब्‍ल्‍यूएपी-7 ‘शतक’ को रेलवे बोर्ड मेम्‍बर (ट्रैक्‍शन) घनश्‍याम सिंह रेलवे और डीएलडब्‍ल्‍यू की महाप्रबंधक रश्मि गोयल ने हरी झंडी दिखाकर लोकार्पित किया। इस दौरान जनवरी में सेवानिवृत्‍त होने वाले उत्‍पादन से जुड़े डीरेका के सात कर्मचारियों भी विशेष तौर पर लोकार्पण समारोह में मौजूद रहे।

ड्राइवर कैब का किया निरीक्षण
इसके पूर्व रेलवे बोर्ड मेंबर (ट्रैक्‍शन) घनश्‍याम सिंह ने महाप्रबंधक रश्मि गोयल एवं अन्‍य प्रमुख अधिकारियों के साथ इस रेल इंजन के ड्राइवर कैब का निरीक्षण किया। रेल इंजन के निरीक्षण के दौरान घनश्‍याम सिंह ने महाप्रबंधक एवं प्रमुख अधिकारियों से इस रेल इंजन से संबंधित महत्‍वपूर्ण तकनीकी जानकारियां प्राप्‍त कीं।

डीरेका है बाबा विश्वनाथ की नगरी का नगीना
इस अवसर पर अपने सम्‍बोधन में रेलवे बोर्ड मेंबर (ट्रैक्‍शन) घनश्‍याम सिंह ने डीरेकाकर्मियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डीरेका बाबा विश्‍वनाथ की नगरी का वह नगीना है, जो सम्‍पूर्ण विश्‍व में चमक बिखेर रहा है।

विश्‍व का अग्रणी प्रोडक्‍शन युनिट बन रहा डीएलडब्‍ल्‍यू
उन्‍होंने डीरेका कर्मियों का उत्‍साहवर्धन करते हुए कहा कि परिवर्तन को आत्‍मसात करने वाला ही संसार बदलता है। जिस प्रकार डीरेका ने हरित ऊर्जा को आगे बढ़ाते हुए विद्युत रेल इंजनों के उत्‍पादन का ‘शतक’ पूरा किया, इससे पता चलता है कि भारतीय रेल की यह प्रोडक्‍शन युनिट डीरेका विदेशों पर निर्भर न रहकर रेल इंजन उत्‍पादकता में विश्‍व के अग्रणी प्रोडक्‍शन युनिट के रूप में उभर रहा है।उन्‍होंने कहा कि यह नि:संदेह भारत को विश्‍व गुरू बनाने की दिशा में अग्रसर है।

इस अवसर पर उन्‍होंने डीरेका की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्‍य में डीरेका 55 से 60 रेल इंजन प्रतिमाह उत्‍पादन करने में सक्षम होगा।

50 हजार का दिया पुरस्कार
समारोह के दौरान डीरेकाकर्मियों की इस महान उपलब्धि से अभिभूत होकर रेलवे बोर्ड मेंबर (ट्रैक्‍शन) घनश्‍याम सिंह ने 50,000 रुपये का सामूहिक पुरस्‍कार प्रदान करने के साथ ही साथ रेल इंजन निर्माण से जुड़े जनवरी माह में रिटायर होने वाले सात कर्मचारियों एवं चालक दल को 5,000-5,000 रुपये पुरस्‍कार की घोषणा की।

6 माह में ही कर दिखाया कमाल
रेलवे बोर्ड मेंबर (ट्रैक्‍शन) घनश्‍याम सिंह एवं डीरेकाकर्मियों का स्‍वागत करते हुए महाप्रबंधक रश्मि गोयल ने विद्युत रेल इंजन उत्‍पादन के इतिहास से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। उन्‍होंने कहा कि भारतीय रेल को विद्युत कर्षण पर बदलने की दिशा में सरकार की नीति के अनुसार 6 माह की अल्‍प अवधि के अंदर डीरेका ने बुनियादी ढांचे, मशीनों, प्रक्रियाओं को नवोन्‍मेष एवं री-इंजीनियरिंग द्वारा तैयार किया तथा तकनीशियनों को इन-हाउस प्रशिक्षण दिया गया।

2017 में पहले विद्युत इंजन का किया निर्माण
उन्‍होंने बताया कि इन प्रयासों के साथ डीरेका ने फरवरी, 2017 में अपने पहले विद्युत रेल इंजन का निर्माण किया। 2016-17 में मात्र 2 विद्युत रेल इंजन निर्माण की छोटी सी शुरुआत के साथ, 2017-18 में उत्पादन धीरे-धीरे बढ़कर 25 रेल इंजन तक पहुंच गया। डीरेका ने दिसम्‍बर 2018 से विद्युत रेल इंजनों की उत्पादन क्षमता को 18 रेल इंजन प्रति माह तक बढ़ा दिया है।

कुल 104 विद्युत रेल इंजनों का हुआ निर्माण
डीरेका द्वारा 2018-19 के दौरान अब तक 77 विद्युत रेल इंजन का निर्माण किया गया है। दिसम्‍बर 2018 तक डीरेका ने कुल 104 विद्युत रेल इंजनों का निर्माण किया है। उन्‍होंने सदस्‍य/कर्षण महोदय को रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्‍य के अनुसार विद्युत रेल इंजन के उत्‍पादन के प्रति आश्‍वस्‍त किया।

इटारसी लोको शेड जाएगा ये बिजली इंजन
महाप्रबंधक रश्‍मि गोयल के अनुसार इस 6000 हॉर्स पॉवर का डब्‍ल्‍यूएपी-7 रेल इंजन संख्या- 37073 को पश्चिम मध्‍य रेलवे के इटारसी विद्युत लोको शेड को भेजा जा रहा है। इस अवसर पर बड़ी संख्‍या में विभागाध्‍यक्ष, अधिकारी, कर्मचारी परिषद् के सदस्‍य एवं कर्मचारी उपस्थित थे।