अब नहीं हो पाएगा परीक्षा में ‘जुगाड़’, काशी विद्यापीठ ने किया है कुछ ऐसा इंतज़ाम

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नारस। परीक्षा की पारदर्शिता के लिए यूजीसी के साथ साथ सरकारें में भी प्रयासरत हैं, लेकिन उसके बाद भी लोग जुगाड़ से पास होते देखे गए हैं। शिक्षा की नगरी काशी में स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब इस जुगाड़ पर अंकुश लगाने का फैसला किया है।

व्यावसायिक कोर्सों की ही तरह अब विश्वविद्यालय की स्नातक व स्नातकोत्तर परीक्षाओं की कापियों की भी कोडिंग और डिकोडिंग कराने का निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिया है। ऐसे में अब किसी भी तरह के जुगाड़ से परीक्षार्थी पास नहीं हो पाएगा।

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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय में इस वक़्त सेमेस्टर परीक्षाओं की कापियों मूल्यांकन हो रहा है। इस बार ये कापियां कोडिंग डीकोडिंग के ज़रिए चेक हो रही हैं। विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कालेजों की कापियों को मिक्स कर कोडिंग और डिकोडिंग कराई गई है। इससे जुगाड़ की आस में बैठे परीक्षार्थियों को झटका लगा है। यह कोडिंग और डिकोडिंग एक निजी संस्था द्वारा कराया गया ताकि कोई पैरवी भी कारगर न हो सके।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार ऐसी ही कोडिंग और डिकोडिंग स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं की कापियों में कराने का फैसला लिया है। इस सम्बन्ध में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ एसएल मौर्या ने बताया कि व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की कापियों का मूल्यांकन तेज़ी से हो रहा है। एक सप्ताह के भीतर परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।

वहीं इस बार मार्च में होने वाली यूजी और पीजी की परीक्षा का टाइमटेबल घोषित कर तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं। इस बार वार्षिक परीक्षा की कापियां भी कोडिंग और डिकोडिंग से जांची जाएगी ताकि कोई भी परीक्षार्थी ‘जुगाड़’ न लगा पाए। इसके अलावा इस वर्ष स्नातक की वार्षिक परीक्षा सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कराने का निर्णय लिया है।

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