नारस। एक ओर जहां केंद्र सरकार गरीबों के बेहतर इलाज के लिये आयुष्मान भारत योजना समेत कई अन्य योजनाएं चला रही है, तो प्रदेश की सरकार गरीबों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र का निर्माण कर जेनेरिक दवाइयों की बिक्री करा रही है। कुल मिलाकर गरीबों को उनकी बीमारी में किस तरह बेहतर इलाज मुहैया हो सके, इसके लिये मोदी-योगी सरकार भले ही लाख मशक्‍कत कर रही हों, मगर सरकारी अस्‍पताल के कर्मचारियों का रवैया किसी से छिपा नहीं है।

आरोप : बद्तमीजी से पेश आता है स्‍टाफ
बड़े और रसूखदार लोगों का तो पता नहीं, लेकिन एक आम इंसान अगर सरकारी अस्‍पताल में जाता है तो उसे वहां इलाज से ज्‍यादा अस्‍पतालकर्मियों की जलालत भरी बोली और रौब से ही खीज उत्‍पन्‍न होने लगती है। फिलहाल हम बात कर रहे हैं, पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय राजकीय चिकित्सालय वाराणसी की। यहां की दुर्व्यवस्था न सिर्फ मरीजों का दर्द बढ़ा रही है, बल्‍कि यहां कार्यरत स्टाफ नर्स के व्यवहार से मरीज के परिजन बुरी तरह से आहत हो रहे हैं। आलम ये है कि इस अस्पताल में पहले तो मरीज को भर्ती कराने से लेकर उनका उपचार कराने में तीमारदारों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है, उसके बाद हद तो तब हो जा रही है जब थके-मांदे और अपनों के रोग से परेशान परिजनों को अस्‍पताल के स्‍टाफ की बद्तमीजी भरी कटु वचन सुनना पड़ रहा है, मगर मजबूरी जो न करा दे।

शिकायत कोई सुनने वाला ही नहीं है
बनारस में एक कहवात है ”जबरा मारे रोने न दे”, इसी तर्ज पर यहां के कर्मचारियों की शिकायत भी सुनने वाला कोई नहीं है। जिससे वह अपनी मनमानी करते रहते हैं। दो दिन पहले बुधवार को कुछ ऐसा ही नजारा चिकित्सालय परिसर में देखने को मिला। जहां सेवापुरी क्षेत्र से आए एक मरीज के परिजनों को घंटों की मशक्कत करने के बाद अस्पताल में बेड उपलब्ध हो सका, जबकि मरीज के भर्ती हो जाने के बाद दूसरे दिन गुरुवार को डॉक्टर ने उसकी सुध ली। इस बीच मरीज अपने बेड पर तड़पता रहा।

एक गरीब राज मिस्‍त्री की दास्‍तां..
बताया जाता है कि जंसा थाना क्षेत्र के गोसाई पुर गांव निवासी राम दुलार पटेल 65 वर्ष राजगीर मिस्त्री हैं। बुधवार को सिहोरवा गांव में एक मकान में काम करते समय वह छत से गिर गए। जिससे उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई तथा सिर में भी चोट आई। परिजन उन्हें लेकर राजकीय पंडित दीनदयाल चिकित्सालय पहुंचे। यहां डॉ राजेंद्र प्रसाद को दिखाने के बाद उन्होंने मरीज को भर्ती करने के लिए एनआरसी वार्ड में भेज दिया।

भर्ती होने के 15 घंटे बाद देखने आये डॉक्‍टर साहब
परिजनों का आरोप है कि दोपहर 2 बजे भर्ती हुए रामदुलार को भर्ती हो जाने के बाद कोई भी डॉक्टर देखने नहीं आया। रात लगभग 9:00 बजे असहनीय दर्द की पीड़ा से पिता को तड़पता देख उनके पुत्र ने जब स्टाफ नर्स से कहा कि हमारे मरीज को असहनीय पीड़ा हो रही है तो उसने कहा कि जाकर डॉक्टर से बात करिए। इसके बाद डॉक्टर को फोन मिलाया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ बताया। फिर स्टाफ नर्स से कहा गया कि डॉक्टर ने कोई पेन किलर या नींद की दवा नहीं दी है, तब उसने मरीज को पेन किलर का इंजेक्शन तथा नींद का इंजेक्शन दिया।

परेशान तीमारदारों से नर्स की बद्तमीजी
दूसरे दिन गुरुवार को प्रातः 9 बजे फिर से रामदुलार को दर्द की शिकायत होने पर जब स्टाफ नर्स से कहा गया तब उसने रामदुलार के पुत्र पर ही झल्लाते हुए कहा कि स्टाफ नर्स का काम केवल डॉक्‍टर के निर्देशों का पालन करना है, यदि आप के मरीज को तकलीफ है तो जा कर डॉक्टर से बात करिए।

सीयूजी नंबर स्‍विच ऑफ
वहीं इस संबंध में जब डॉक्‍टर को जानकारी देने के लिए उनका सीयूजी नंबर मिलाया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ होना बताया। इसके साथ ही सीएमएस चिकित्सा अधीक्षक सभी के नंबर स्विच ऑफ बताया।

उलटे मरीज के परिजनों पर ही लगा दिया आरोप
काफी जद्दोजहद के बाद किसी तरह डॉक्‍टर को जब मरीज के पास बुलाया गया तो उन्होंने रामदुलार के पुत्र पर ही दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मरीज को एनआरसी वार्ड से सर्जिकल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

पहले भी हो चुका है कई बार झगड़ा
बताते चलें कि इस चिकित्सालय परिसर में स्टाफ नर्स के व्यवहार के चलते पूर्व में भी कई बार झगड़ा फसाद हो चुका है। बावजूद इसके यहां के कर्मचारियों पर किसी प्रकार का अंकुश नहीं लगा। चिकित्सालय में कार्यरत डॉक्टर लाख हिदायतों के बाद भी मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। जिससे केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं पर सवालिया निशान उठता है।