नारस। मकर संक्रांति पावन पर्व पर काशी के घाटों पर आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। ज्योतिशो के अनुसार भले ही आज शाम 7 बजकर 50 मिनट पर संक्रांति लग रहा है, जिसके चलते मुख्य स्नान कल यानी 15 को है लेकिन आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाईं।

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रात से ही घाटों पर लग गया श्रद्धालुओं का तांता
मा गंगा में डुबकी लगाने के लिए आधी रात से ही श्रद्धालु काशी केसभी घाटों पर गंगा स्नान के लिए पहुंच गये थे।

पूरे भारतवर्ष में मकर संक्रांति का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तपर्ण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति का पर्व अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है।

मकर संक्रांति पर दान का है विशेष महत्व
वही बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भक्त सुबह से ही आज के दिन गंगा के पावन घाटों पर पहुंच गए थे। मान्यता है कि आज के मकर संक्रांति के दिन जो भी भक्त सच्चे मन और विश्वास के साथ मां गंगा का स्नान कर गरीबों को दान करता हैं, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। स्नान व दान-दक्षिणा का महत्व भी इस दिन मानकर भक्तों ने अपने सामर्थ्य अनुसार गंगा स्नान कर दान किया।

ऐसी मान्यता है कि कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान सौ गुना होकर लौटता है इसलिए भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूजन करके घी, तिल, कंबल और खिचड़ी का दान किया जाता है।लोगो का यह भी मानना है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा-यमुना-सरस्वती के है।

संगम प्रयाग में सभी देवी-देवता अपना रूप बदलकर स्नान करने आते हैं। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है।

आज से शुरू होता है शुभ कार्य
इस दिन पतंगें उडाने का भी विशेष महत्व है।इसलिए इस दिन पतंगें भी उड़ाई जाती हैं। माना जाता है कि संक्रांति के स्नान के बाद पृथ्वी पर फिर से शुभकार्य की शुरुआत हो जाती है।

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