नारस। माघ माह की मौनी अमावस्या पर गंगा तट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ा। हज़ारों लोगों ने देर रात से ही शुभ मुहर्त में गंगा में पुण्य की डुबकी लगना शुरू कर दी थी। माघ माह में बने विलक्षण संयोग से यह स्नान और भी ज़्यादा कल्याणकारी हो गया। इस बार माघ माह में सोमवती और मौनी अमावस्या एक ही दिन ही पड़ी है। गंगा के तट पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने खुले दिल से दान भी किया। वहीं स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए नदी में एनडीआरएफ के जवान मुस्तैद रहे।

प्रयागराज की ही तरह काशी के तट पर सदा नीरा में श्रद्धालुओं ने आस्था और कल्याण की डुबकी लगाईं। सभी अपनी अपनी मनोकामनाओं के साथ साथ यहां डुबकी लगाने पहुंचे थे। देर रात से ही आस्थावान इस पर्व पर सदा नीरा में शुभ मुहर्त के बाद से डुबकी लगा रहे थे। इस सम्बन्ध में डीएलडब्लू की श्रद्धालु अंजू पांडेय ने बताया कि आज मौनी अमावस्या है। इसलिए हम यहां पुण्य की डुबकी लगाने आए हैं और इस डुबकी का नियम है कि बिना कुछ बोले यहाँ डुबकी लगानी है। इस तरह डुबकी लगाने से सभी कार्य कल्याणकारी होते है।

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वहीं घाट पुरोहित पंडित बासुदेव ने बताया कि शास्त्रों में लिखा है कि रोज़ कुछ देर के लिए मौन रहना चाहिए पर भाग दौड़ की ज़िंदगी में ये संभव नहीं है इसलिए मौनी अमावस्या का पर्व है। इसमें बिना कुछ बोले इसमें स्नान करना है दान करना है और अपने पितरों को याद करना है।

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