नारस। अतीत का डफरिन ब्रिज और भारतीय उपमहाद्वीप का अपने आप में पहला पुल अब मालवीय सेतु और आम बोलचाल की भाषा में राजघाट पुल, यह अपने निर्माण के 100 पूरा कर चुका है और इसकी सुरक्षा मियाद भी खत्म हो चुकी है। ऐसे में इसपर से रेलवे ने भारी वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन गाहे बगाहे इस पर से भारी वाहनों के आवागमन की सूचनाए मिलती रही हैं और आज मौनी अमावस्या को लेकर जब शहर में बड़ा रुट डाईवर्जन चल रहा है ऐसे में सुबह सवेरे इसपर से दर्शनार्थियों से भरी प्रतिबंधित श्रेणी की बस आराम से निकाली गई और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी मूक दर्शक बने रहे मानो इन्हे पता हो कि ये बस आने वाली है।

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शहर के राजघाट पुल से सुजाबाद पुलिस चौकी (रामनगर थानाअंतर्गत ) को क्रास कर स्नानार्थियों से भरी मध्य प्रदेश की एक बस बहुत ही आराम से राजघाट पुल से होते हुए राजघाट पुलिस चौकी ( थाना आदमपुर ) क्रास कर वाराणसी शहर में प्रवेश कर गई। इस दौरान राजघाट पुल पर भयंकर जाम भी लगा रहा। इसमें ख़ास बात यह रही कि दो दो पुलिस चौकी से होकर यह बस प्रतिबंधित क्षेत्र से गुज़री पर किसी भी पुलिस कर्मी ने इस बस को रोकना गवारा न समझा।वही मौके पर कोई भी ट्रेफिक पुलिसकर्मी नहीं दिखा |

अब यहाँ ये प्रश्न उठता है कि यदि दिन में बिना किसी रोकटोक के भारी वाहन इस जर्जर पुल से आसानी से पार हो रहे हैं तो गहरी काली रात में क्या होता होगा। इस पुल पर हाल में ही भगदड़ से हादसा हो चुका है। प्रतिबंधित वाहन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं।

क्या है पुल का इतिहास
तस्वीरों में गंगा की छाती पर शान से खड़ा यह पुल कितना पुराना है शायद यह आज की पीढ़ी ना जानती हो पर लोहे का बना यह पुल 1अक्टूबर 1887 में जब पहली बार इकहरी (सिंगल) रेल लाइन और पैदल पथ के लिए खोला गया तो इसका नाम पन्नो में दर्ज हो गया। तब इसका नाम डफरिन पुल (Dufferin Bridge) था। आज़ादी के बाद 5 दिसंबर 1947 को इस पुल का नाम पंडित मदन मोहन मालवीय को समर्पित करते हुए इसका नाम मालवीय पुल रख दिया गया। इस पुल को अवध और रूहेलखंड के इंजीनियरों ने मिलकर बनाया था।

जब तत्कालीन महराज बनारस ईश्री प्रसाद नारायण सिंह की उपस्थिति में इस पुल का उद्घाटन हुआ तो एक नयी इबारत लिखी गयी। वक़्त के थपेड़ों को झेलता हुआ यह 1048.5 मीटर लम्बा पुल अब धीरे धीरे जर्जर हो रहा है कुछ साल पहले इस पुल की मियाद ख़त्म हो गयी थी, तब इसपर से भारी वाहनों का आवागमन तत्तकालीन बसपा सरकार ने रोक दिया था।

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