वाराणसी के इस जांबाज़ अफसर के खौफ से जेल जाना पसंद करते हैं क्रिमिनल

नारस। उत्तर प्रदेश पुलिस में जाबांज अफसरों की कमी नहीं है। जांबाज़ अफसरों की फ़ौज में कुछ अफसर ऐसे भी हैं जो अपराधियों की आंख की किरकिरी बन गए हैं। कई ने ऐसे अपराधियों को जेल की राह दिखाई है तो कुछ अपराधी इनके खौफ से जेल में हैं। वाराणसी जनपद भी होनहार और जाबाज़ पुलिसकर्मियों से भरा पड़ा है। इन्ही में से एक हैं वाराणसी क्राइम ब्रांच के सर्विलांस विंग के सर्विलांस प्रभारी राजिव रंजन उपाध्याय, जिन्होंने मन में देश प्रेम और देश की रक्षा का जज्बा लिए साल 2001 में पुलिस की वर्दी पहन अपराधियों में खौफ और जनता को खुशनुमा माहौल दिया है।

वाराणसी पुलिस के एक और नायाब अफसर सर्विलांस प्रभारी राजिव रंजन उपाध्याय से हमने बात की, कि कैसे उन्होंने सेना में जाने के विचार को त्याग पुलिस की वर्दी पहन पहले गोरखपुर फिर देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, वाराणसी, गाजीपुर और दुबारा से वाराणसी में कैसे अपराधियों को उनकी असली जगह पहुंचाई।

देश रक्षा का जज्बा लाया पुलिस की सेवा में
राजीव रंजन उपाध्याय के पिता स्वर्गीय बी जे उपाध्याय बिहार के सीवान में प्रोफ़ेसर थे। प्रोफ़ेसर पिता और गृहणी मां नीलम उपाध्याय के बड़े बेटे राजीव की स्कूलिंग सिवान में हुई पर उन्होंने अपना ग्रेजुएशन और लॉ की डिग्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ली। राजीव रंजन ने बताया कि हम 13 दोस्तों का ग्रुप था इलाहाबाद में और हम सभी एनसीसी कैडेट्स थे। मैंने साल 1997 में जब गणतंत्र दिवस परेड पर एनसीसी के जवानों को कमांड किया परेड में तो देश भक्ति का जज्बा रग रग में दौड़ गया और सेना में जाने की तैयारी और एग्जाम देने लगा पर किस्मत ने साथ नहीं दिया। उसी दौरान 2001 में सीधी भर्ती निकली सब इन्स्पेक्टर की बस उसे भर दिया और इस पीली वर्दी को पहन देश और समाज की रक्षा कर रहा हूँ।

गोरखपुर से शुरू हुआ सफ़र
राजीव रंजन उपाध्याय ने बताया कि मै जब अंडर ट्रेनी था तब भी गोरखपुर में था और पहली पोस्टिंग भी गोरखपुर के पीपीगंज थाने में स्टेशन आफिसर के पद पर हुई। उसके बाद गोरखपुर के सभी थानों पर स्टेशन आफिसर रहा। उसके बाद 2012/2013 में गोरखपुर में एसटीऍफ़ प्रभारी भी रहा। राजिव रंजन ने बताया कि गोरखपुर में पोस्टिंग के दौरान कई दुर्दांत अपराधियों को उनकी असली जगह दिखाई। उनमे से छोटा राजन गिरोह के गुर्गे राजन श्रीवास्तव को पकड़ना सबसे चैलेंजिंग रहा। उसके ऊपर शासन ने 50 हज़ार का इनाम घोषित किया हुआ था।

एलआईसी के 80 लाख लूट के भागा था राजन श्रीवास्तव
राजीव रंजन उपाध्याय ने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय से इंग्लिश ग्रेजुएट अपराधी और छोटा राजन गिरोह का ख़ास सदस्य राजन श्रीवास्तव गोरखपुर से दिन दहाड़े एलआईसी के कर्मचारी और दो गन मैंन को घायल कर 80 लाख रूपये लूट कर भाग गया था। बाद में एक व्यक्ति की इस मामले में मौत भी हो गई थी। इसपर उस अमे की सरकार ने 50 हज़ार का इनाम रखा था। हमने इसकी सुरागरसी की तो पता चला की ये बिहार के गोपालगंज जिले में अपनी नई पहचान के साथ रह रहा था।

पब्लिक ने किया विरोध हुई सीबीसीआईडी जांच
राजिव रंजन ने बताया कि जब हम इसे पकड़ने के लिए पहुंचे तो वहां इसकी जेंटलमैन छवि को जानने वाले स्थानीय लोग हम पर बरस पड़े और भारी विरोध के बीच हम उसे गिरफ्तार करके गोरखपुर लाए। उसके बाद कई सारी जांच के साथ साथ सीबीसीआईडी ने भी हमारे इस फैसले की जांच की और हमें क्लीन चिट मिली।

जब अपराधी ने दी जान से मरने की धमकी
वाराणसी के सर्विलांस प्रभारी राजीव रंजन उपाध्याय जब गोरखपुर के खोराबार थानाध्यक्ष तो उन्होंने एक चार पहिया वाहन चोर को 25 चार पहिया वाहन के साथ गिरफ्तार किया था। यह वाहन चोर ओझा दिल्ली पुलिस के एक सब इन्स्पेक्टर का हत्यारा था। राजीव ने बताया कि यह हमारे थाने से जब पेशी पर ले जाया जा रहा था तो रस्ते में कांस्टेबल से कुछ खरीदने का बहना बनाकर उसकी ह्त्या कर शव को फेक कर फरार हो गया था। बाद में उसे दिल्ली पुलिस ने पकड़ा तो मै दिल्ली इंट्रोगेशन के लिए गया। वहां से उसे रिमांड पर लेकर गोरखपुर आया तो उसने मीडिया में बयान दिया कि मेरे जीवन का एक ही लक्ष्य है कि राजिव रंजन को मौत के घाट उतार सकूं।

डीआईजी ने कहा रख लो गनर
अपराधी की धमकी के बाद गोरखपुर के मौजूदा डीआईजी विनोद बाबु शुक्ला ने राजीव रंजन से कहा कि यह शातिर अपराधी है और कुछ भी करवा सकता है इसलिए आप एक गनर रख लो, पर राजिव ने इस बात को नकार दिया और एक पेशी के दौरान सीजीएम कोर्ट में मैंने उसे कहा कि यदि तुम्हे ज़िंदा रहना है तो बेहतर है कि जेल में रहो। इसपर उसने कोर्ट में एक हलफनामा दिया कि यदि मेरी ह्त्या होती है तो उसका ज़िम्मेदार राजीव रंजन उपाध्याय होंगे। वह अपराधी फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।

मिले हैं कई सम्मान और पुरुस्कार
राजीव रंजन उपाध्याय को कई सारे प्रशस्ति पत्र और कई सारे पुरुस्कारों से पुलिस विभाग ने सम्मानित किया है।

राजीव रंजन उपाध्याय का एक बेटा है। उनका छोटा भाई सीवान में रहता है जहां बिजनेस के साथ साथ किसानी भी करता है। राजीव रंजन उपाध्याय अपने परिवार की सुरक्षा के साथ साथ वाराणसी जनपद की सुरक्षा में भी दिन रात लगे हुए हैं। बीते सालों में उन्होंने वाराणसी में कई सारे अपराधियों को जेल का रास्ता दिखाया है।