नारस। पैग़म्बर मोहम्मद साहब की एकलौती बेटी जनाबे फ़ातिमा स.अ.की दिलसोज़ शहादत की याद में शहर बनारस में अकीदतमंदों ने फ़रशे अज़ा बिछा दी। आप शेरे ख़ुदा मौला अली की ज़ौजा और इमामे हसन व इमामे हुसैन की माँ थी।

पैग़म्बर साहब ने आपको दुनिया की औरतों की सरदार का ख़िताब दिया था। मस्जिद मीर नादे अली दालमंडी, दरगाहे फ़ात्मान लल्लापुरा, मदनपुर, शिवाला, लाटसरैयां, मदरसा ईमानिया मुक़ीमगंज, मदरसा जव्वादिया प्रह्लादघाट समेत शहर बनारस के लगभग हर शिया आबादी वाले क्षेत्र में मजलिसे आयोजित की गईं और ख़ातूने जन्नत जनाबे फ़ातिमा स.अ. के जीवन एवं उनकी शिक्षा पर प्रकाश डाला।

बताया गया कि क्या क्या घटनाक्रम हुए की मोहम्मद साहब की वफात के 75 या 95 दिन बाद ही आपने भी इस दुनिया को अलविदा कहा और बहुत मज़लूमी के हालात में अपने पीछे अपने छोटे छोटे बच्चों को बिलखता छोड़ गईं।

पैग़म्बर मोहम्मद साहब की वफात और लोगों के रवैये ने आपको इतना दुःखी कर दिया था कि 18 बरस की उम्र में ही आप के बाल सफेद हो गए और कमर झुक गई थी और अपने आखिरी दिनों में आप ने बहुत तकलीफ के साथ इस दुनिया को छोड़ा। आपके इसी ग़म और मुसीबत को याद करके आपके चाहने वाले आप पे आंसू बहाते हैं।

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