अपराधियों के लिए खौफ बना ये इंस्पेक्टर है बेहद नर्मदिल, दिव्यांग की कहानी सुन हो उठा था परेशान

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नारस। हिन्दुस्तान में जितना ज़्यादा समाज के लिए कोई व्यक्ति पुलिस विभाग में रहते हुए कर सकता है, उससे ज्यादा किसी अन्य विभाग में रहकर नहीं कर सकता। ये कहना है वाराणसी पुलिस के जाबाज़ इन्स्पेक्टर और इस समय लंका थाना प्रभारी भारत भूषण तिवारी का। साल 2007 में पुलिस सेवा में आए भारत भूषण तिवारी ने वाराणसी और सोनभद्र में अपनी सेवा से समाज में पुलिस की एक सकारात्‍मक तस्वीर कायम की है। साथ ही अपराधियों में पुलिस का खौफ भी पैदा किया है।

बलिया ज़िले के रसड़ा निवासी रिटायर्ड लेक्चरर अश्वनी कुमारी तिवारी के पुत्र भारत भूषण तिवारी साल 2007 में वाराणसी के रोहनिया थाने पर पहली पोस्टिंग पर आये। उसके बाद से आज तक आप समाज की सेवा पुलिस की वर्दी पहन कर रहे हैं। हमने भारत भूषण तिवारी से उनके इस सफर के बारे में विस्‍तार से बात की।

नौकरी की तलाश में आये पुलिस सेवा में 
रसड़ा, प्रयागराज (इलाहबाद) और दिल्ली से पढ़ाई करने वाले भारत भूषण तिवारी ने बताया कि नौकरी की तलाश कर रहा था। उसी समय भर्ती आई थी सब इन्स्पेक्टर के पद की और उसका फ़ार्म भर दिया, जिसके बाद साल 2007 में सब इन्स्पेक्टर के पद पर वाराणसी के रोहनिया थाने पर पहली पोस्टिंग हुई। उसके बाद बाबतपुर चौकी इंचार्ज, लल्लापुरा चौकी इंचार्ज, डीएलडब्लू चौकी इंचार्ज, चितईपुर चौकी इंचार्ज और उसके बाद सर्विलांस प्रभारी रहा। साल 2012 में सोनभद्र ट्रांसफर हुआ और साल 2018 में सारनाथ थाना प्रभारी बनकर वापस आया।

जब डाक्टर बेटे ने करवाई पिता रिटायर्ड दरोगा की हत्या
अपराधियों के दिल में उत्तर प्रदेश पुलिस का खौफ पैदा करने वाले लंका थाना प्रभारी भारत भूषण तिवारी ने बताया कि जब मैं सोनभद्र के घोरावल का थाना प्रभारी हुआ करता था। उस समय ओबरा में एक रिटायर्ड दरोगा राम नारायण यादव की हत्या हुई थी। उनके घर में घुसकर, 6 महीने तक इस मर्डर मिस्ट्री को जब कोई खोल नहीं पाया तो मुझे एसपी सोनभद्र ने काम सौंपा था। इस हत्याकांड की जब कड़ी से कड़ी मिलाई तो रिटायर्ड दरोगा का सरकारी डाक्टर बेटा ही उनका हत्यारा निकला। उसने जौनपुर और वाराणसी के शूटरों से दस लाख की सुपारी देकर पिता की ह्त्या करवाई थी।

पहली पत्नी का था बेटा
भारत भूषण तिवारी ने बताया कि रिटायर्ड दरोगा ने दो शादियां की थी। हत्यारोपी उनका लड़का उनकी पहली पत्नी का पुत्र था और दूसरी पत्नी से उनकी दो बेटियां थी, जिनकी शादी उन्होंने सीओ और इंजिनियर से की थी। इन दोनों शादियों में उन्होंने बहुत पैसा खर्च किया था। डाक्टर लड़के को यह आक्रोश था की पिता सारा पैसा अपनी दूसरी पत्नी और उनकी बेटियों पर खर्च कर रहे हैं। इसी आक्रोश में उसने अपने पिता की ह्त्या करवा दी।

भीड़ से पकड़ा अपहरणकर्ता
भारत भूषण तिवारी जब डीएलडब्लू चौकी इंचार्ज हुआ करते थे उस समय एक स्कूल से एक बच्चे का अपहरण हुआ था। उन्होंने बताया कि हमने जाकर स्कूल की सीसीटीवी चेक की तो बच्चे का चचेरा भाई जो नौकर के साथ उसे लेने गया था उसे कहीं लेकर चला जाता है। हम अभी सीसीटीवी फुटेज से उसके चचेरे भाई का चेहरा देख ही रहे थे कि परिजनों ने जाम लगा दिया। उसके बाद हम लोग वहां पहुंचे तो उसी भीड़ में चचेरा भाई भी दिखा गया। उसे हमने हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म क़ुबूल लिया और हमने बच्चे को सकुशल रिकवर कर लिया।

59 लाख की लूट का किया था पर्दाफाश
वाराणसी के महमूरगंज इलाके में 59 लाख रूपये की लूट हुई थी। उस समय भारत भूषण तिवारी चितईपुर चौकी इंचार्ज हुआ करते थे। उन्होंने बताया कि इस मामले का हमने खुलासा किया था और पैसे भी रिकवर हुए थे। उसके बाद उन्हें वाराणसी में एसओजी में सर्विलांस प्रभारी बनाया गया था।

समाज के लिए हैं नज़ीर
लंका थाना प्रभारी सिर्फ अपनी वर्दी से ही नहीं बल्कि समाज में रियल हीरो के रूप में भी जाने जाते हैं। भारत भूषण तिवारी अपने खर्चे पर सोनभद्र के एक दिव्यांग की पूरी पढ़ाई का खर्चा दे रहे हैं। उनसे इस बारे में हमने जानना चाहा तो उन्होंने कहा जाने दीजिए इसमें क्या रखा है, लेकिन हमने ज़िद की तो उन्होंने बताया कि सोनभद्र में पोस्टिंग के दौरान एक नाविक प्रतियोगिता में गया था। उसी समय एक लड़का आया और उसने मेरे पैर छुए और चला गया लेकिन जब कार्यक्रम ख़त्म हुआ और वह जाने लगा तो देखा उसने जूता उल्टा पहना था, मैंने लोगों से पूछा तो उन्होंने बताया कि इसकी मां और ये रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे उसी समय ट्रेन आ गई तो इसकी मां की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई और इसके दोनों पैर कट गए।

घर गया तो हो गया चकित
भारत भूषण तिवारी ने बताया कि एक दिन मैं उसके घर गया तो देखा वो पढ़ रहा था। पूछा पढ़ने नहीं जाते तो बोला की पहले जाता था पर इसबार कक्षा चार में गया हूं और मेरा क्लास दूसरी मंज़िल पर है और मैं ऊपर नहीं चढ़ पाता हूं, इसलिए पढ़ाई छोड़ दी अब आगे नहीं पढूंगा। मैंने जब उससे कुछ सवाल पूछे कक्षा चार के तो उसने मुँहज़बानी बता दिए। मै प्रभावित हुआ और उसके कृत्रिम पैर लगवाए। अब वह डीएवी शक्तिनगर में पढ़ रहा है। इस सेशन से उसका एडमिशन वाराणसी में करवाना है।

भारत भूषण तिवारी की एक बिटिया भी है। भारत भूषण तिवारी ने पुलिस सेवा को हिंदुस्तान की सबसे अच्छी सेवा बताया और कहा कि इसमें आप अमीर-गरीब, शरीफ-बदमाश और स्वस्थ-बीमार तबके के लोगों से रोज़ मुलाकात करते हैं। ऐसे में जितना ज़्यादा काम का वैरिएशन और क्षेत्र पुलिस सेवा में है कहीं नहीं हैं।