नारस। मारीशस की रहने वाली और मानव विकास के ओपन अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय “यूक्रेन” से आध्यात्मिकता में पीएचडी रखने वाली साईं मां कुंभ के बाद काशी प्रवास को पहुंची हैं। यहां उन्होंने हरिश्चंद्र घाट के पास स्थित अपने आश्रम सत्य साइन मोक्ष धाम में भक्तों को दर्शन दिए। यह आश्रम साईं मां का मुख्य आश्रम है।

साईं मां 40 दिन कुम्भ में रही उसके बाद वाराणसी पहुंची हैं। यहां उन्होंने अपने अनुयायियों को सम्मानित किया। साईं मां मारीशस की रहने वाली हैं। कुछ वर्षों पहले उनकी मुलाक़ात आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा से हुई थी। उनसे प्रभावित लक्ष्मी देवी, अब साईं मां उनके साथ अध्ययन करने के लिए अक्सर पुट्टपर्ती, भारत की यात्रा करते थी। एक सक्रिय कैरियर और पारिवारिक जीवन को बनाए रखते हुए, साईं माँ ने साईं बाबा से प्राप्त शिक्षाओं और विषयों का अभ्यास करने पर ध्यान केंद्रित किया।

2007 में साईं माँ विष्णु शक्ति ट्रस्ट को भारत में साईं माँ के मानवतावादी कार्यों के समर्थन के लिए एक पंजीकृत भारतीय दान के रूप में स्थापित किया गया था। अब तक की परियोजनाओं में महिला सशक्तीकरण, गरीबों को भोजन, गर्म कपड़े और कंबल वितरित करना, आपदा राहत कार्य और जरूरतमंद लोगों को मोतियाबिंद सर्जरी और विटामिन वितरण जैसी मुफ्त चिकित्सा सेवाएं शामिल हैं। 2009 में ट्रस्ट के लिए राष्ट्रीय मुख्यालय के रूप में वाराणसी में हरिश्चंद्र घाट पर संपत्ति खरीदी गई थी, और सत्य साईं मोक्ष धाम आश्रम का निर्माण साल 2010 में शुरू हुआ।

उन्होंने वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस ऑन रिलिजन एंड मॉडर्न सिविलाइज़ेशन बनाया, जो वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ़ रिलिजन में एक प्रतिनिधि रही हैं और इटली में पोप के ग्रीष्मकालीन निवास पर सिंथेसिस संवाद में भाग लिया था।

बता दें कि 21 साल की उम्र में साईं मां फ्रांस चली गई और वहां उन्होंने एक शोध वैज्ञानिक से शादी कर ली। फ्रांस में ही इन्होने प्राकृतिक चिकित्सा, होम्योपैथिक और अस्थिचिकित्सा की पढ़ाई की और एक नई प्रथा चलाई चिकित्सा की, इसके अलावा सांई मां राजनीति में भी सक्रिय रहीं। साईं मां ने बोर्डो सिटी काउंसिल में कई वर्षों तक सेवा की, फ्रांसीसी सरकार की ओर से यूरोपीय संघ में स्वास्थ्य देखभाल में सुधार करने में भी इन्होने मदद की।

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