वाराणसी के राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1 से जुड़ी दुनिया की नम्बर 1 कंटेनर कंपनी ‘मर्स्‍क लाइन’

नारस। राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1 से दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर कंपनी मर्स्‍क लाइन का नाम जुड़ गया है। वाराणसी के रामनगर स्थित टर्मिनल मर्स्‍क लाइन (Maersk Line ) कंपनी और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने मंगलवार को हरी झंडी दिखाकर कार्गो वेसेल्स आरवी टैगोर को रवाना किया।

डेनमार्क की कम्पनी मर्स्‍क लाइन के साऊथ एशिया हेड ने बताया कि आज टेस्ट के लिए हम खाली कंटेनर भेज रहे हैं, अगर रिस्पॉन्स अच्छा मिला तो हम आगे भी काम शुरू करेंगे। वाराणसी से 16 कंटेनर लेकर कलकत्ता के लिए कार्गो वेसेल्स निकल चुका है। जो 1200 किलोमीटर की दूरी 8 दिनों में तय करेगा।

बता दें कि मर्स्‍क लाइन दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कन्टेनर सर्विस प्रदान करने वाली कम्पनी है। ये दुनिया के 130 देशों में व्यापार करती है और इसने तकरीबन 70,000 लोगों को रोजगार दे रखा है।

12 नवम्‍बर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने वाराणसी में गंगा नदी (राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1) पर भारत का पहला नदी तट मल्‍टीमॉडल टर्मिनल राष्‍ट्र को समर्पित किया था। उन्‍होंने उसी दिन गंगा नदी (राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1) पर कोलकाता से वाराणसी जाने वाले देश के पहले कंटेनर कार्गो को भी रिसीव किया। ये दोनों घटनाएं भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन (अजप) के विकास में न केवल ऐतिहासिक साबित हुईं बल्कि ये घटनाएं राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1 पर व्‍यापारिक गतिविधियों में भी तेजी से उछाल का कारण बनी।

इनलैंड वाटर वेज अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के ट्रैफिक मेंबर शशिभूषण शुक्ला ने बताया कि इस उपलब्धि से माल ढुलाई में एक तिहाई खर्च आएगा। उन्होंने बताया कि लगातार अंतरराष्ट्रीय कंपनी भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग में रुचि दिखा रही है।

गंगा नदी पर मर्स्‍क के कंटेनर उसी प्रकार आवाजाही करेंगे जिस प्रकार पेप्सिको, इमामी एग्रोटेक, इफको फर्टिलाइजर, डाबर इंडिया जैसी कंपनियों द्वारा कंटेनर की आवाजाही हो रही है। मर्स्‍क के अंतर्देशीय जलमार्ग से जुड़ जाने से, आंतरिक इलाकों से सीधे बांग्‍लादेश तक और बांग्‍लादेश से आंतरिक इलाकों तक तथा बंगाल की खाड़ी से होते हुए शेष विश्‍व तक कार्गो की आवाजाही की जाएगी।

उन्होंने बताया कि सरकार, विश्व बैंक की तकनीकी और वित्तीय सहायता से हल्दिया से वाराणसी (1390 किलोमीटर) तक 5369 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के तहत राष्ट्रीय जलमार्ग -1 (गंगा नदी) को विकसित कर रही है। इस परियोजना से 1500-2,000 डीडब्ल्यूटी की क्षमता वाले जलयानों का वाणिज्यिक नौचालन संभव हो पाएगा।

वहीं कंटेनर भेजने वाली कंपनी मर्स्‍क लाइन के साऊथ एशिया और इस्टर्न इंडिया के प्रबंध निदेशक स्टीव एल्डर ने बताया कि आज हमने 16 खाली कंटेनर कलकत्ता के लिए भेज हैं। इसके बाद हम इसके ऊपर आये खर्चों का विश्लेषण करके आगे इसे जारी रखें या न रखें उसपर विचार करेंगे। यदि सब कुछ हुआ तो महीने में तीन से चार कंटेनर यहां से जलमार्ग से कलकत्ता जायेगा।