नारस। लोकबन्धु राजनारायण इंटर कालेज, मोतिकोट, गंगापुर में आयोजित ‘राजनारायण एवं प्रजातान्त्रिक पुनर्जागरण में उनकी उपयोगिता’ विषयक समागम में पहुंचे सूबे के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि हमें न्यायपालिका और संसद के प्रति सम्मान रखना चाहिए पर अफ़सोस की बात है कि आज राजनीति में ऐसा नहीं हो रहा है। राजनीति में हम सबको सभ्यता का परिचय देना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि राजनीति में सम्मान से विचार रखने चाहिए पर दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि आज हमें राजनारायण जैसे व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए।

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राज्यपाल ने कहा कि आज मैं गंगापुर में राजनारायण जी के व्यक्तित्व और आज के राजनीतिक परिपेक्ष्य में ही उस समारोह में कहकर आया हूँ। राजनारायण जी ने जिस प्रकार संघर्ष किया, व चुनाव हारने के बाद भी 1971 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सरकारी संसाधानों का दुरुपयोग किया तो उन्होंने उच्च न्यायलय के माध्यम से संघर्ष किया। वो ज़मीनी नेता थे और संघर्ष करने वाले नेता थे। उन्होंने कहा कि संवैधानिक दृष्टि से न्‍यायपालिका और संसद बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। हमें हर एक के प्रति सम्मान रखना चाहिए।

विपक्ष द्वारा विधानसभा में किये गये हंगामे के सवाल पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि जिस दिन मेरा उद्बोधन था उस दिन विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। वो मेरे ऊपर कागज़ का गोला फेंकते रहे पर मैंने अपना दायित्व निभाया। इस दौरान एक समाजवादी विधायक बेहोश भी हो गए जिन्हें मैंने अस्पताल भेजवाया और बाद में अस्पताल पहुंचकर उनकी कुशल क्षेम भी पूछी। हमारा व्यहवहार ऐसा होना चाहिए ताकि अनुकरणीय कार्य करने की इच्छा हो।

राजनीति में लगातार एक दूसरे पर हो रही ओछी बयानबाजी पर उन्होंने कहा कि हमें सभ्यता का परिचय देना चाहिए। मैं पहले के राजनीतिज्ञों को देखता रहा हूं, अटल जी थे, इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। उसके बाद नरसिम्हा राव जी के कार्यकाल में अटल जी विपक्ष के नेता थे। सम्मान के साथ सभी एक दूसरे के विचारों को सुनते थे, लेकिन आज वही नहीं होता।

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