लेखक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से राजनीती शास्त्र में ग्रेजुएशन अंतिम वर्ष के छात्र हैं। बीएचयू के छात्र कुंदन कुमार जी की कलम से (साभार)


जैश ए मोहम्मद ने जिस कायराना आत्मघाती हमले को अजांम दिया है,वह घोर अमानवीय तथा निदंनीय है। सीआरपीएफ के 78 गाड़ियों के काफिले पर पुलवामा आतंकी हमले के बाद समस्त देश में पाकिस्तान के खिलाफ रोष एवं गुस्से की आग भड़क उठी है। शहर से सुदूर गाँव तथा स्कूल से कालेज तथा विश्वविद्यालय तक पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी का दौर एवं विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया।

पाकिस्तान के इस कायराना हरकत के बाद भारत सरकार ने विश्व बिरादरी के सामने पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने की मुहिम तेज कर दी है। भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान से सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र का दर्जा छीन लिया। ज्ञात हो कि विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार वर्ष 1996 से पाकिस्तान को भारत ने सर्वाधिक तरजीह राष्ट्र का दर्जा दे रखा था। सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र का दर्जा छीनने के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क 200 फीसद तक बढा़ दिया है।

विश्व व्यापार संगठन के अनुच्छेद 21 बी के तहत कोई भी देश तब किसी देश को दिया सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र का दर्जा वापस ले सकता है,जब दोनों देशो के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दे पर विवाद हो।

ईरान ने भी दी है चेतावनी
ऐसा नहीं हैं कि पाकिस्तान के कायराना हरकत से सिर्फ भारत परेशान है,बल्कि पाकिस्तान का पड़ोसी अफगानिस्तान तथा ईरान भी पाकिस्तान की हरकत से परेशान है। पुलवामा में फिदायिन हमला जिसकी जिम्मेदारी जैश ए मोहम्मद आंतकी संगठन ने ली है, उससे ठीक एकदिन पहले अर्थात् 13 फरवरी को ईरान की सेना पर हुए आतंकी हमले में ईरान के 27 कमांडो शहीद हो गए थे। ईरान ने इस आतंकी हमले का जिम्मेदार पाकिस्तान को माना है। ईरान के मेजर जनरल मोहम्मद जाफरी ने जिहादी समूह जैश अल अद्ल को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

ईरान करेगा सैन्य कार्रवाई
यह बात दुनिया को पता है कि जैश-अल-अदल् को पाकिस्तानी सेना तथा सरकार का संरक्षण प्राप्त है।यहीं नहीं ईरान ने पाकिस्तान को चेताते हुए सीधे शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करें अन्यथा ईरान की सेना पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ खुद सैन्य कदम उठाने को तत्पर एवं सक्षम है।

अफगानिस्तान में करवा रहा बवाल
दक्षिण एशिया में अवस्थित अफगानिस्तान का जिक्र आते ही काबुल तथा काबुलीवाला की यादें जेहन में ताजा हो जाती है। अफगानिस्तान रेशम मार्ग और मानव प्रवास का एक प्राचीन केन्द्र बिन्दू रहा है। प्राचीन भारतीय धर्मग्रंथ महाभारत में भी गंधार का उल्लेख है। जो फिलहाल अफगानिस्तान में अवस्थित है। इसके अलावा महान् राजनीतिज्ञ तथा मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु आचार्य चाणक्य का संबंध भी गंघार से रहा है। प्राचीन काल में संस्कृति और शिक्षा का केन्द्र अफगानिस्तान आज तालिबानी गोलियों और बमों से छलनी हो चुका है। यह बात दीगर है कि तालिबान को दानापानी पाकिस्तान से मिलता है। तालिबान के सहारे पाकिस्तान अफगानिस्तान का नामों निशान तक मिटाने पर तुला है।

डूरंड सीमा विवाद में उलझा है अफगानिस्तान
सीमा विवाद को लेकर पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के मध्य संबंध कभी समान्य नहीं रहें; पख्तून अफगानिस्तान का इलाका है। जिसपर ज़बरदस्ती पाकिस्तान अपना कब्जा जमाना चाहता है। इसी वजह से पाकिस्तानी सरकार पख्तून के अलगाववादियों का खुल कर समर्थन करती है।

वर्ष 1893 में अफगान शासक अमीर अब्दुल रहमान खान और ब्रितानी सरकार के सचिव सर डूरंड ने सरहद हदबंदी के जिस समझौते पर दस्तख्त किए। उसकी मियाद सौ वर्ष तक ही थी,जो 1993 में ही खत्म हो गया। यही नहीं अफगान सरकार का मानना है कि ये सीमा समझौता तो ब्रिटिश भारत से हुआ था इसलिए 14 अगस्त 1947 को ही डूरंड रेखा की वैधता समाप्त हो गई थी। दरअसल,1893 में जो डूरंड रेखा खींची गई थी,वह 100 वर्ष के लिए नहीं वरन् अमीर अब्दुल रहमान खान की जिदंगी तक ही मानी गई थी।

आतंकियों का कोई सगा नहीं
सीमा विवाद को लेकर ही पाकिस्तान अफगानिस्तान के खिलाफ हमेशा षड्यंत्र रचते रहता है तथा अफगानिस्तान की आतंरिक सुरक्षा में व्यवधान उत्पन्न करते रहता है। जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के भारत के प्रयास को चीन हमेशा निष्फल बना देता है। चीन शत्रु का शत्रु मित्र वाली कूटनीति पर काम कर रहा है लेकिन चीन को यह समझना चाहिए कि आतंकी का कोई सगा नही होता है, जिस पाकिस्तान नें आतंकवाद को आश्रय दे रखा है वही पाकिस्तान पेशावर में स्कूली बच्चों पर हुए आतंकी हमले के बाद ‘खून का आंसू ‘रोया था।

चीन है भ्रमित
चीन अगर इस भ्रम में है कि आतंकवाद उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा तो यह चीन के सेहत के लिए खतरनाक है। पुलवामा आतंकी हमला और ईरान की सेना पर हुए आतंकी हमले के बाद दुनिया के सभी देशों को आतंकवाद और आतंकवादी को आश्रय देने वाले देशों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की आवश्यकता है। वरना आतंक के प्रकोप से सारी कायनात एकदिन कब्रिस्तान में तब्दील हो जाएगी।