श्री काशी विश्‍वेश्‍वर ज्‍योतिर्लिंग (फाइल फोटो)
नगर संवाददाता, सचिन यादव

नारस। इतिहास में पहली बार महाशिवरात्रि के एक दिन पहले से ही बाबा का मंदिर दूर-दूर से आये आस्‍थावान श्रद्धालुओं के लिये खुला हुआ है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि बाबा विश्वनाथ का मंदिर शयन आरती के बाद भी भक्तों के दर्शन के लिये खुला है। कहा जा रहा है कि ऐसा बाबा विश्वनाथ के मंदिर के इतिहास में पहली बार हुआ है।

भारी भीड़ को देखते हुए लिया गया फैसला
जानकारों की मानें तो अबतक केवल महाशिवरात्रि की रात में ही बाबा का दरबार पूरी भक्तों के लिए खुला रहता था, मगर आस्‍थावानों के महारेले को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इसी के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब लगातार 48 घंटो तक मंदिर में भक्तों का प्रवेश होता रहेगा।

कुंभ के पलट प्रवाह के कारण हुई इतनी भीड़
प्रयागराज में पिछले डेढ़ माह से चल रहे कुंभ की भीड़ के पलट प्रवाह के चलते वाराणसी में बाबा के दर्शन को पूरे भारत से श्रद्धालुओं का महारेला जुट गया है। रविवार सुबह से ही लाखों की संख्‍या में आस्‍थावान श्रद्धालु बाबा विश्‍वनाथ को जल चढ़ाने की कामना लिये काशी नगरी पहुंच चुके हैं। इसे देखते हुए रविवार को विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन ने शयन आरती के बाद भी मंदिर को खोले रखने का निर्णय लिया है।

आस्‍थावानों का ख्‍याल करते हुए अपनाया गया आपत्‍तिकाल का विधान
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष पंडित अशोक द्विवेदी ने बताया कि रविवार को पूरे दिन इतनी जबरदस्त भीड़ थी की कतार में लगे लोग मंदिर का पट बंद होने के समय तक भी दर्शन नहीं कर पाते। देश दुनिया के तमाम हिस्सों से आए आस्थावानों की आस्था को चोट ना पहुंचे एवं आठ 8 घंटे तक कतार में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश ना होना पड़े इसलिए आपत्ति काल के विधान को अपनाते हुए शयन आरती के बाद भक्तों को झरोखे से दर्शन कर कराने का निर्णय किया गया।

कपाट बंद मगर झरोखे से हो रहा दर्शन
पंडित अशोक द्विवेदी ने बताया कि रोज की तरह शयन आरती के बाद गर्भगृह के चारो द्वार बंद कर दिए जाएंगे। भक्त इन दरवाजों पर बने झरोखों से बाबा का दर्शन करते रहेंगे। बताया गया कि रविवार दोपहर में भीड़ को देखते हुए भी गर्भगृह में प्रवेश रोक दिया गया था। भक्तों को झांकी दर्शन कराया जा रहा था।

जल चढ़ाने की लालसा रह गयी अधूरी
झरोखे से बाबा का दर्शन करने वाले भक्तों ने असंतोष जताया है। बाबा को जल व दूध चढ़ाने की लालसा लिये हजारों किलोमीटर का सफर तय करके काशी पहुंचे कई भक्‍तों ने अपनी मनोकामना अधूरी रह जाने की शिकायत की है।

पूर्व महंत ने उठाये सवाल
इधर मंदिर के पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी ने कहा है कि शयन आरती के बाद भी भक्तों को मंदिर में प्रवेश देना काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के विपरीत है। उन्होंने अवसर विशेष पर रात्रि 2:30 बजे से ही मंगला आरती करने के औचित्य पर भी सवाल उठाया है।