प्रतीकात्मक चित्र

नारस। लोकसभा चुनावों में चुनाव ड्यूटी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का वोट मतपत्र के ज़रिए लिफाफे से मतगणना स्थल तक पहुंचता है, पर अक्सर यह लिफाफा मतगणना के बाद पहुंचता है, जिससे उन लिफाफों के खुलने का कोई मतलब नहीं रह जाता और वो मत बेकार जाते हैं।

ऐसे में मुख्य निर्वचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को ज़िले में ही इन लिफाफों का मुद्रण करवाने को कहा है, क्योंकि पहले ये अन्य ज़िलों में मुद्रित होकर देर से पहुँचते थे। इस व्यवस्था के बाद वाराणसी लोकसभा सीट के उन 5109 मतदाताओं का भी शत प्रतिशत मतदान संभव हो पायेगा, जो लिफाफों के जरिये वोट डालते हैं।

खास बात यह कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी आदेश दिए हैं कि मतदान से 15 दिन पहले बाहर रहने वाले मतदाताओं के नाम और पते पर लिफाफे भेज दिए जाएं जिससे समय से जिला निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध हो सके।

मतगणना के बाद पहुंचता है लिफाफा
जिले से बाहर रहने वाले मतदाताओं का मतदान कराने के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से मतदान से पहले लिफाफे भेजे जाते हैं। उनमें मतपत्र होते हैं और मतदाता अपने हिसाब से मतदान कर लिफाफा जिला निर्वाचन कार्यालय को भेज देता है, लेकिन अक्सर चुनावों में होता ये है कि मतगणना होने के बाद लिफाफे पहुंचते हैं। क्योंकि मतगणना होने और विजयी प्रत्याशी की घोषणा के बाद लिफाफे के खुलने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

मतगणना से पहले खुलते हैं लिफाफे
नियमों के मुताबिक मतगणना से पहले जिले से बाहर रहने वाले मतदाताओं के लिफाफे खोले जाते हैं। उनकी मतगणना होने के बाद जिले में पड़े वोट की गिनती शुरू होती है। कुल मिलाकर इस व्यवस्था को अगर सही तरह चलाया जाएगा तो मतदान को लेकर मतदाताओं को होने वाली समस्या का निराकरण भी हो जाएगा और हर कोई अपने मत का प्रयोग कर पाएगा।