प्रतीकात्मक तस्वीर

नारस। 2018 के स्वच्छता सर्वेक्षण में 67वां स्थान पाने वाले वाराणसी शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में एक बार फिर झटका लगा है और वह देश में तीन स्थान और नीचे 70 वे पायदान पर पहुँच गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में लगातार दो साल पहले पायदान पर रहने वाला वाराणसी तीन स्थान खिसककर चौथे पायदान पर आ गया है। फिलहाल नगर निगम और उसके अधिकारियों की लापरवाही और जनता में जागरूकता की कमी ने वाराणसी के सर से नंबर एक का ताज छीन लिया है।

1250 नंबर की होने वाली स्वच्छता परीक्षा में इस बार वाराणसी का परफॉर्मेंस बहुत खराब रहा है। बीते साल की तुलंबा में इस साल बुनियादी सुविधाओं में कटौती हुई है। सबसे खराब स्थिति तो कैटेगरी सर्टिफिकेशन में व सर्विस लेवल प्रोग्रेस में रही। सर्विस लेवल प्रोग्रेस में बनारस को कुल 694 नंबर मिला है।

इसबार की स्वच्छता परीक्षा में नगर निगम भी अपनी प्रगति सही करने में नाकामयाब रहा है और उसे टोटल 450 अंक ही मिले हैं। वहीं डायरेक्ट ऑब्ज़र्वेशन यानी स्थलीय निरिक्षण में 982 अंक मिले हैं। चार प्रकार की कैटेगरी में अलग-अलग हुई स्वच्छता परीक्षा के 5000 अंकों में से वाराणसी सिर्फ 3063 अंक ही अर्जित कर पाया है।

ये रहे कारण
बनारस शहर को इस बार टॉप -20 में दाखिल करवाने के लिए मेयर मृदुला जायसवाल और नगर आयुक्त आश्वस्त थे पर कल आए रिज़ल्ट ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसका मुख्य कारण अधिकारियों का लचर प्रदर्शन और जनता का जागरूक न होना रहा। मेयर मृदुला जायसवाल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के अलावा सिर्फ सदन की कार्रवाई के वक़्त नज़र आती हैं।

इसके अलावा अभी भी शहर में कई ऎसी जगह है, जहां लोग खुले में शौच करते हैं, जैसे कज़्ज़ाकपुरा मलिन बस्ती आदि बस्तियों के निवासी लबे सड़क और खुले में शौच के लिए मजबूर हैं।