”अगर एक शब्द में कहूं तो व्यवस्था और सुरक्षा के मामले में वर्ल्‍डक्‍लास होगा विश्वनाथ धाम कॉरिडोर।”

ये कहना है श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और श्रीकाशी विश्‍वनाथ विशिष्‍ट क्षेत्र विकास परिषद् के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी यानी सीईओ विशाल सिंह का।


नारस। पिछले एक साल से तमाम उतार-चढ़ाव और किस्‍म-किस्‍म की सिरदर्दी को झेलते हुए इस प्रोजेक्‍ट को शिलान्यास समारोह तक पहुंचाने वाले अधिकारी और उनकी टीम की प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सार्वजनिक तौर पर प्रशंसा की है। काशी विश्वनाथ मंदिर और श्रीकाशी विश्‍वनाथ विशिष्‍ट क्षेत्र विकास परिषद् के सीईओ विशाल सिंह ने इसे गौरवभरा क्षण बताया है। उन्‍होंने कहा है, ”इससे हमारी टीम के उत्साह में वृद्धि हुई है और अब हम जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू करते हुए इस प्रोजेक्‍ट को अंतिम रूप देने के लिये उत्‍साहित हैं।”

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खुद को गौरवान्‍वित महसूस कर रहे
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह के अनुसार, ”प्रधानमंत्री ने मंच से कहा कि हमारी टीम ने बिना किसी राजनीतिकरण के इस कार्य को किया है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। इन शब्दों को सुनकर हमारी पूरी टीम, हम सभी खुद को गौरवान्वित समझ रहे हैं। इसके बाद हम सभी और भी उत्साह के साथ इस कार्य को पूरा करेंगे।”

बेहद मुश्‍किल सफर के बाद आयी है ये घड़ी
बता दें कि विश्‍वनाथ कॉरीडोर का यहां तक का सफर बेहद मुश्‍किलों भरा रहा है। तमाम तरह के विरोध, आंदोलनम् और राजनीति के भंवर में उलझते-सुलझते ये प्रोजेक्‍ट आखिरकार शिलान्‍यास समारोह तक पहुंचा है, तो इसके पीछे सबसे अहम योगदान प्रोजेक्‍ट के सीईओ विशाल सिंह का ही रहा है।

बार-बार निशाने पर आते रहे विशाल सिंह
बनारस की बेहद जटिल गलियों में जब विश्‍वनाथ कॉरीडोर का काम शुरू हुआ तब सबसे पहले विशाल सिंह का सामना यहां के स्‍थानीय लोगों और दुकानदारों के गुस्‍से से हुआ। बेहद गुंथी हुई और तंग गलियों में से एक बड़े भूभाग को खाली कराना और वहां मौजूद पुराने मकानों को ध्‍वस्‍थ कराना कोई छोटा-मोटा काम नहीं था। लाहौरी टोला, नीलकंठ, विश्‍वनाथ गली, नेपाली खपड़ा, त्रिपुर भैरवी, ब्रह्मनाल, टेढ़ी नीम इलाके में पीढ़ियों से रह रहे लोगों के निशाने पर रातों-रात विशाल सिंह आ गये। सबसे बड़ी चुनौती थी स्‍थानीय लोगों का इस विशेष क्षेत्र से लगाव। हांलाकि अधिकारी विशाल सिंह ने अपनी सूझ-बूझ का परिचय देते हुए इस चुनौती को सुलझाया और स्‍थानीय बाशिंदों को भारी-भरकम मुआवजा देकर जगह खाली करायी गयी।

फिर शुरू हुई प्रोजेक्‍ट को लेकर राजनीति…
एक चुनौती दूर हो ही रही थी कि विशाल सिंह के सामने नयी चुनौती ने सिर उठाना शुरू कर दिया। नरेन्‍द्र मोदी के बहाने काशी विश्‍वनाथ कॉरीडोर का विरोध कर रही राजनीतिक पार्टियों ने विशाल सिंह के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। विशाल सिंह और उनकी टीम पर आरोप लगने लगा कि मकानों को तोड़ते वक्‍त प्राचीन मंदिरों को भी तोड़ा जा रहा है और इस धार्मिक इलाके को टूरिस्‍ट स्‍पॉट बनाया जा रहा है।

धार्मिक संगठन भी कूदे
राजनीतिक दलों तक तो ठीक था, लेकिन देखते ही देखते धार्मिक संगठनों ने भी इस प्रोजेक्‍ट के विरोध में मोर्चा खोल दिया। विश्‍वनाथ कॉरीडोर के बहाने पूरी की पूरी मोदी और योगी सरकार की विश्‍वस्‍नीयता ही निशाने पर ले ली गयी। मोदी-योगी सरकार की तुलना औरंगजेब के शासनकाल से होने लगी और इन दोनों सरकारों पर हिन्‍दू विरोधी होने का आरोप लगने लगा। चूंकि पूरे प्रोजेक्‍ट को विशाल सिंह ही लीड कर रहे थे, लिहाजा विरोध करने वालों को मनाना और मीडिया को समझाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य रहा।

शुरू हुआ आंदोलनम्
इस बीच द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्‍वरूपानंद सरस्‍वती के शिष्‍य प्रतिनिधि स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने विश्‍वनाथ कॉरीडोर प्रोजेक्‍ट में काशी के विनायकों का अपमान किये जाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्‍होंने पूरे प्रोजेक्‍ट की तुलना बड़े ‘अनर्थ’ से करते हुए इसके खिलाफ श्रृंखलाबद्ध तरीके से आंदोलनम् का शंखनाद कर दिया। पदयात्राएं निकलीं, प्रेसकॉन्‍फ्रेंस हुईं, हुंकारें भरी गयीं, चेतावनियां दी गयीं। साथ ही साथ विभिन्‍न सामाजिक संगठनों की ओर से भी पोस्‍टर चिपकाये गये और तो और अस्‍सी इलाके में नाले के पास से मिले सैकड़ों अद्धनिर्मित शिवलिंगों को भी विश्‍वनाथ कॉरीडोर से जोड़ने की कुचेष्‍टाएं हुई्ं, मगर विशाल सिंह फिर भी नहीं झुके।

दोषी ठहराये गये…
यही क्‍यों, मई 2018 में हुए चौकाघाट पुल हादसे और रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में पात्रों की तबीयत बिगड़ने को भी अभुभ लक्षण बताया गया। कहा गया कि विश्‍वनाथ कॉरीडोर की वजह से देवता काशी से रूठ गये हैं। बावजूद, ना तो विशाल सिंह रुके और ना ही किसी के आगे झुके।

वक्‍फ वाले भी हुए खफा
हिन्‍दू धार्मिक संगठनों और विभिन्‍न राजनीतिक दलों से मोर्चा ले रहे विशाल सिंह को तब नयी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जब ज्ञानवापी मस्‍जिद के पास वक्‍फ के एक भू-खंड पर मौजूद चबूतरे को उन्‍होंने गली में खड़े रहने वाले ड्यूटीरत पुलिसकर्मियों के लिये शेल्‍टर बनवाने का प्रयास किया। अभी उस भू-खंड पर साफ-सफाई का कार्य शुरू ही हुआ था कि शहर में हल्‍ला मच गया कि ज्ञानवापी मस्‍जिद की दीवार विश्‍वनाथ कॉरीडोर प्रोजेक्‍ट में लगे अफसरों ने दबंगई करते हुए गिरा दी है। फिर क्‍या था रातों-रात जंगल की आग की तरह फैली इस अफवाह ने मुस्‍लिमपक्ष को भड़काने का काम किया और भारी संख्‍या में लोगों ने चौक थाने को घेर लिया। इसके बाद रात में ही विशाल सिंह ने नाराज पक्ष को समझाते हुए इस मामले को भी बिना किसी हिंसा और उपद्रव के शांत करा दिया।

कायनात हमारे साथ है
फिलहाल लंबे विरोध और जद्दोजदह के बाद आखिरकार विश्‍वनाथ कॉरीडोर प्रोजेक्‍ट अपने पहले पड़ाव यानी शिलान्‍यास तक पहुंच चुका है। यहां से अब लोकार्पण होने तक निर्माणकार्यों की एक लंबी प्रक्रिया चलेगी, जिसे फिलहाल विशाल सिंह ही लीड कर रहे हैं। अबतक के घटनाक्रम को याद करते हुए विशाल सिंह ने बस इतना ही कहा, ”बहुत विरोध था, लोग घर छोड़ने को नहीं तैयार थे। इस योजना में काफी कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिला इस एक वर्ष में, लेकिन कहीं न कहीं मन में विश्वास था। बाबा का आशीर्वाद रहा है, साथ ही साथ श्रद्धालुओं की दिक्कतों को ख़त्म करने का भी मन में विश्‍वास था, इसलिए यह संभव हुआ या कहें कि प्रकृति हमारे साथ थी।”

कौन हैं विशाल सिंह ?
आखिरकार एक साल की जद्दोजहद के बाद अब विश्‍वनाथ कॉरीडोर प्रोजेक्‍ट का शिलान्‍यास हो चुका है। चार चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्‍ट के पहले और तीसरे चरण का कार्य प्रधानमंत्री द्वारा शिलान्‍यास के बाद ही शुरू हो गया है। तकरीबन 8 लाख स्‍क्‍वायर फुट एरिया में बन रहे विश्‍वनाथ कॉरीडोर प्रोजेक्‍ट को लीड कर रहे विशाल सिंह हाईली क्‍वालिफाइड अफसरों में गिने जाते हैं। इन्‍होंने अमेरिका के प्रतिष्‍ठित मैरिलैंड युनिवर्सिटी और लंदन स्‍कूल ऑफ बिजनेस से उच्‍च शिक्षा हासिल की है।

इन महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारियों को संभाल चुके हैं विशाल सिंह
2003 बैच के पीसीएस अफसर विशाल सिंह नोएडा और गाजियाबाद के उप जिलाधिकारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा विशाल सिंह भारत सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ई-गवर्नेंस डिवीजन में निदेशक का पद भी संभाल चुके हैं। यूपी बुलंदशहर में एडिशनल डिस्‍ट्रिक्‍ट मैजिस्‍ट्रेट एंड कलेक्‍टर के अलावा विशाल सिंह वाराणसी विकास प्राधिकरण के सचिव, यूपी स्‍किल डेवलपमेंट में ज्‍वाइंट मिशन डायरेक्‍टर के पद पर रहते हुए अपनी जिम्‍मेदारियों को बखूबी अंजाम दे चुके हैं।

देखें वीडियो, विशाल सिंह और उनकी टीम के बारे में वाराणसी में क्‍या बोले प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी

 

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वाराणसी का रहने वाला हूं। 2005 से पत्रकारिता के विभिन्‍न माध्‍यमों से जुड़ा हुआ हूं। टीवी, प्रिंट व वेब मीडिया में फील्‍ड और डेस्‍क का अनुभव है। जी न्‍यूज़, अमर उजाला, हिन्‍दुस्‍तान, ईनाडु इंडिया सहित विभिन्‍न संस्‍थानों से जुड़कर अपनी सेवाएं दे चुका हूं। 2013 में वाराणसी के सबसे पहले डेली न्‍यूज के डिजिटल वेब पोर्टल Live VNS की शुरुआत की है। वेब डिज़ाइनिंग, ग्राफिक्‍स डिज़ाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, SEO, SEM, वीडियो एडिटिंग, सोशल मीडिया स्‍ट्रेटेजी/मार्केटिंग आदि सेक्‍टर में हाथ आजमाता रहता हूं। अभी पत्रकारिता के आधा गुण ही हैं मुझमें। सोशल मीडिया पर यहां मुझसे जुड़ें।