नारस। शनिवार को डीएवी पीजी कॉलेज में यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओक्लाहोमा के दस सदस्यीय टीम के द्वारा जेंडर विषयों पर कार्यशाला का आयोजन किया।

स्त्री विमर्श के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओक्लाहोमा की एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. लिण्डसे चर्चिल ने बतौर मुख्य वक्ता कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाओं को अपने खिलाफ हुई ज्यादती के विरूद्ध आवाज उठानी ही होगी। इसकी शुरूआत सबसे पहले अमेरिका से ही हुई है।

अमेरिका के ओक्लाहोमा प्रान्त महिलाओं का हो रहा है शोषण

अमेरिका के ओक्लाहोमा प्रान्त की स्थिति जेण्डर विषयों पर बेहद ही खराब है, वहां महिलाओं का जिस प्रकार से शोषण और दोहन होता है वह पूरी दुनिया में अचंभित कर देने वाला तथ्य है। उन्होंने कहा कि ओक्लाहोमा आज भी अमेरिका का सबसे रूढ़िवादी प्रान्त है, जहां महिलाओं को लैंगिक स्वतंत्रता न के बराबर प्राप्त है।

भारत की स्तिथि है बेहतर

वही भारत में इसकी तुलना में स्थिति काफी हद तक ठीक है। ठीक यही दशा एलजीबीटी समूह के साथ भी है। वर्तमान में अमेरिका की एक बड़ी आबादी एलजीबीटी समुदाय का हिस्सा बन चुकी है लेकिन फिर भी लोग एलजीबीटी पर बात करने से हिचकिचाते हैं।

लैंगिक दर्द की अनुभूति करने की है जरुरत

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डाॅ. अनुराधा बनर्जी ने कहा कि ओक्लाहोमा में महिलाओं के लिए जो स्थितियां हैं वे वाकई चिंताजनक हैं। भारत में समाज सुधारको खास तौर से राजाराममोहन राय ने महिलाओं की स्थिति को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया। हम सबको लैंगिक दर्द की अनुभूति करने की आवश्यकता है तभी इनके लिए सार्थक आवाज उठ सकेगी।

इससे पूर्व कार्यशाला का शुभारम्भ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।अतिथियों का स्वागत डाॅ. संगीता जैन, संचालन डाॅ. पारूल जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. स्वाति सुचरिता नंदा ने दिया।

इस अवसर पर ओक्लाहोमा यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल में डाॅ. डायना पारदो, मार्को सेलस, जैकब रिव्स, जोसुआ मिसेल, जेनिफर फिलिप्स, एनामेरी लोपेज, एश्ले, एण्ड्रयू शामिल थे। कार्यक्रम में डाॅ. ऋचा रानी यादव, डाॅ. पूनम सिंह, डाॅ. मीनू लाकड़ा, डाॅ. शैलजा सिंह, डाॅ. सुषमा मिश्रा, डाॅ. नेहा चैधरी, डाॅ. प्रतिभा मिश्रा, डाॅ. हसन बानो, डाॅ. बन्दना बालचन्दनानी, डाॅ. सुमन सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं अध्यापक उपस्थित रहे।