नारस। बीते दिनों वाराणसी के पांडेयपुर इलाके में सीवर लाइन में उतरे दो सफाईकर्मियों की दर्दनाक मौत के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। वाराणसी के एक्टिविस्ट जन निगरानी समिति के डॉ लेनिन रघुवंशी और ह्यूमनराइट लीगल नेटवर्क की अनुराधा द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस पी के एस बघेल और जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच कर रही है। बेंच ने राज्य सरकार से सफाईकर्मियों की दर्दनाक मौत की परिस्थितियों पर एफिडेविट देने को कहा है है।

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कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अख्तियार करते हुए सरकार से जवाब मांगा है कि सीवर की सफाई के काम में मशीनों का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा था? साथ ही कोर्ट ने सफाईकर्मियों को सुरक्षा उपकरण नहीं उपलब्ध कराए जाने के कारणों पर भी सफाई मांगी है।

जनहित याचिका दयार करने वाले डॉ लेनिन रघुवंशी ने ने कोर्ट के सामने इस दुर्घटना के तर्क रखते हुए कहा कि एक मार्च को नगर निगम के संविदा सफाई कर्मचारी चंदन और राकेश को पांडेयपुर इलाके में 20 फुट गहरे सीवर में बिना सुरक्षा उपकरणों के उतारा गया था। अंदर जाने पर जहरीली गैस में दम घुटने के चलते उन दोनों की जान चली गई।

जनहित याचिका में यह भी कहा गया कि नियमानुसार सीवर की सफाई में लगे कर्मचारियों को सेफ्टी बेल्ट, ऑक्सीजन मास्क, दस्ताना, जैकेट, चमड़े के जूते दिए जाना जरूरी है क्योंकि सीवर में कार्बन डाइआक्साइड, मीथेन, सल्फर डाइआक्साइड जैसी जानलेवा गैसें जमा होती हैं।

इस जनहित याचिका में आंकड़े देकर बताया कि पूरे देश के 11 प्रदेशों में पिछले एक साल में 97 सफाई कर्मी बिना किसी सुरक्षा के सीवर में उतरने के चलते अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। सरकारी लापरवाही से होने वाली इन मौतों के मामले में यूपी पहले नम्बर पर आता है। 2016 में देशभर में कुल 172 और 2017 में 172 मौते सीवर के अंदर जहरीली गैस से हो चुकी है।

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