नारस। राफेल डील को लेकर देश में राजनीति अपने चरम पर है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेर रहा है। वहीं ताजा मामले, जिसमें राफेल डील से जुडी फाइलों का रक्षा मंत्रालय से चोरी हो जाने का सनसनीखेज प्रकरण सामने आया है, इसपर वाराणसी के विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री को सीधे-सीधे दोषी ठहराते हुए पुलिस से मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

शुक्रवार को जब पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर थे उस वक्‍त वाराणसी में पूर्व सांसद डॉ राजेश मिश्र और आम आदमी पार्टी के नेता संजीव सिंह के नेतृत्व में लंका थाने में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ तहरीर दी गयी है।

बता दें कि राफेल मामले की फाइल रक्षामंत्रालय से चोरी हुई, जिसको 6 मार्च को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के सामने अटार्नी जनरल के के. वेणुगोपालन ने बताया। विपक्षी दल के नेताओं ने इस मामले को देश की सुरक्षा और संरक्षा पर सवाल के लिये खतरा बताया है।

वाराणसी में विपक्षी दलों के नेताओं ने साफ तौर पर कहा है कि रक्षा मंत्रालय से राफेल की फाइल चोरी होने के कारण प्रधानमंत्री प्रतिनिधित्व दायित्व के अंतर्गत निश्चित रूप से दंड के अनुभागी हैं।

आम आदमी पार्ट के नेता संजीव सिंह ने लंका थाने में तहरीर देने के बाद मीडिया को बताया कि ”विकैरियस जिम्मेदारी का सिद्धांत है कि ”जो कोई कार्य मेरे द्वारा कराया गया है वह मेरा कार्य है।” क्योकि अनुच्छेद 75 के द्वारा प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और समस्त मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री के सलाह से राष्ट्रपति करते हैं। समस्त मंत्रीगण प्रधानमंत्री के अनुरूप कार्य करते हैं, तो रक्षामंत्रालय से गोपनीय दस्तावेज, फाइल चोरी होना प्रधानमंत्री के प्रतिनिधित्व का दायित्व बनता है।”

कानून के अनुसार पीएम को किया जा सकता है दण्डित
आप नेता संजीव सिंह के अनुसार, ”इस आधार पर प्रधानमंत्री के ऊपर सिविल और दाण्डिक मामले बनते हैं। इस आधार पर प्रधानमंत्री पर दोनों में दण्डित किया जा सकता है। यदि रक्षामंत्रालय से राफेल की फाइल गायब हुई है तो निश्चित राज्य की जिम्मेदारी है क्योकि “State is the Guardian of Nation” कहा जाता है। जैसे चरनलाल साहू बनाम राज्य इत्यादि मामले में कहा गया है।”

पीएम के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज होने का है प्रावधान
आप नेता संजीव सिंह के अनुसार, ”राज्य की वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री के पास होती है, इसलिए प्रधानमंत्री के कार्यालय या अधीनस्थ मंत्री के कार्यालय से फाइल गायब होता है तो यह चोरी का मामला है और विकैरियस लाईबेल्टिस के तहत संयुक्त दायित्व और प्रतिनिधित्व दायित्व के द्वारा प्रधानमंत्री पर सिविल और IPC के “सामान्य आशय के अग्रसरण” के तहत चोरी का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।”

राष्ट्पति को नहीं दी गयी तथ्य की जानकारी
लंका थाने में तहरीर देने पहुंचे प्रतिनिधित्‍वमंडल के अनुसार, ”तथ्य इशारा करते है कि अनुच्छेद 78 के अधीन राफेल दस्तावेज की जानकारी संसद के सदन में अर्थात राष्ट्रपति को भी जानकारी नही दिया गया। नहीं JPC के सामने ही आयी। जो अनुच्छेद 75(3) के तहत संवैधानिक अपराध है। वही अनुच्छेद 116-117 के तहत भी, यह तथ्य की उपधारणा है। फिर यह फाइल Official Confidence Act का भी उल्लंघन है। इसके तहत जो दस्तावेज Public Domain में राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत नहीं आ सकता उसका गायब होना चोरी और न्यासभंग का अपराध है।”

आम आदमी पार्टी के नेता संजीव सिंह ने कहा, ”मैं प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र दामोदर दास मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का एक मतदाता और देश का सम्मानित नागरिक होने के नाते उपरोक्त विधिक कारणों से प्रधानमंत्री जी के कृत्यों से शर्मिन्दा हूँ, जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और देश का सम्मान गिराया है उनके ऊपर चोरी का मुकदमा दर्ज करने के प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज किया जाय।”