नारस। आर्य महिला पी जी कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया जिसका विषय था ‘विश्व पटल पर स्त्री’, इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रोफेसर श्रद्धा सिंह तथा विशिष्ट अतिथि डॉ बन्दना झा रही। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के कुलगीत से हुआ तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत बैज,पुष्पगुच्छ,और अंगवस्त्रम प्रदान कर किया गया।

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महिला दिवस महिला मजदूरों के संघर्ष का परिणाम

इस अवसर पर प्रोफेसर श्रद्धा सिंह ने कहा कि आज जिस महिला दिवस को हम मना रहे हैं वह महिला मजदूरों के संघर्ष का परिणाम है।उन्होंने अपने वक्तव्य में महिला अधिकार की प्राप्ति के लिए समय समय पर हुए ऐतिहासिक संघर्षों के बारे में बताया।1857 की क्रांति से हमे स्त्री की उपस्थिति के कारकों की खोज करनी होगी।

सत्य वही नही होता जो दिखता है

वही विशिष्ट वक्ता डॉ वन्दना झा ने कहा कि सत्य वही नही होता जो दिखता है वह शब्दों के बीच,पंक्तियों की बीच चुप होता है।भारतीय परिप्रेक्ष्य में1857 की क्रांति से हमे स्त्री की उपस्थिति के कारकों की खोज करनी होगी।किसी भी समाज की संरचना को समझने के लिए हमें डीप स्ट्रक्चर को समझना होगा।इस संबंध में उन्होंने एनी बेसेंट,भगिनी निवेदिता, मां शारदा,कमला नेहरू,और बा के अवदान को रेखांकित किया।

अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ बृजवाला सिंह ने कहा कि आधुनिक संदर्भ में स्त्री चिंतन के मायने बदले हैं।हमें विषद दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ वन्दना चौबे ने किया।अपने संचालन वक्तव्य में उन्होंने कहा कि निम्न मध्य वर्ग की स्त्रियां अपने अधिकारों,स्वाभिमान के प्रति अधिक सजग रहती हैं,वे अपनी छोटी सी कमाई में भी एक बड़े परिवार को पालने का माद्दा रखती हैं जबकि उच्च मध्यवर्ग की महिलाएं लोक लाज,सम्मान आदि की आड़ में हर जुल्म सहती हैं।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ वीना सुमन ने किया।उन्होंने कहा कि यह आयोजन स्त्री विमर्श की दिशा में नई सोच को जन्म देगा, हम बहुत आगे आये हैं लेकिन अभी बहुत दूर जाना है।

इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्राओं, शोध छात्र तथा अनेक शिक्षको की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान किया।

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