नारस। पीएम नरेंद्र मोदी के दुबारा बनारस से चुनाव लड़ाने के बीजेपी संसदीय बोर्ड के फैसले का मतलब कहीं गड़बड़ है। इसे दाल में कुछ काला जैसा बताया, पिंडरा के पूर्व विधायक अजय राय ने। उनके मुताबिक मोदी बनारस से सांसद हैं तो उन्हें बनारस से लड़ाने के फैसले का क्या मतलब?

कभी बीजेपी में रहे कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय शनिवार को मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने मोदी की दुबारा उम्मीदवारी पर सवाल खड़े किए साथ ही काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर पर सवाल खड़े किए। अजय राय साल 2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार थे। इन चुनावों में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को मोदी ने तीन लाख 71 हजार वोटों से हराया था।

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पिछले चुनावों में पीएम मोदी को कुल पांच लाख 81 हजार वोट मिले थे। मोदी के मुकाबले खड़े हुए कांग्रेस के कैंडिडेट अजय राय अपनी जमानत तक न बचा पाए थे। उन्हें सिर्फ लगभग 75 हजार वोट मिले थे। ईस बार जहां बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने नरेंद्र मोदी को दुबारा बनारस से बीजेपी का कैंडिडेट बनाने का फैसला किया है तो अरविंद केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा की है तो वहीं अजय राय की दुबारा उम्मीदवारी को लेकर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।

पूर्व विधायक अजय राय ने नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि काशी के भोले बाबा विश्वनाथ सबके मुक्ति देने वाला केे व्यापक लोक आस्था के महादेव को मुक्त कराने की बात कर रहे हैं। उन्होंने पीएम के इस बयान को बाबा के प्रति गहरी धार्मिक जन आस्थाओं पर चोट तथा काशी की महिमा पर आघात बताया। उन्होंने कहा कि काशी में बाबा के प्रति ऐसे सत्ता दंभ की अभिव्यक्ति से साफ है कि काशी से मोदी जी की सत्ता मुक्ति अपरिहार्य है।

अजय राय ने पीएम मोदी पर तीखे वार करते हुए कहा कि विवादित काशी विश्वनाथ कारीडोर का शिलान्यास करते हुये पीएम का यह कहना, “आज भोले बाबा की मुक्ति का पर्व है, क्योंकि वह काशी में ठीक से सांस तक नहीं ले पा रहे थे”, बेहद शर्मनाक और बाबा के प्रति लोगों की परंपरागत आस्था को ठेस पहुंचाने वाला रहा। हम ऐसी सोच एवं बयान की कड़ी निन्दा करते हैं।

उन्होंने लंका क्षेत्र में रोहित नगर इलाके में मदनपुरा इलाके से ले जाकर फेंके गए शिवलिंग और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में तीन दर्जन से ज्यादा पौराणिक मंदिरों एवं सैकड़ों भवनों को ध्वस्त करने का मुद्दा उठाते हुए कहा, “शिव के गण विग्रहों के अनादर तथा अमर्यादित स्वरूप में शिवलिंगों के कूड़े तक में पाये जाने से काशी पहले से आहत रही है। अब प्रधानमंत्री द्वारा लंबी परंपरा से पौराणिक महत्व के मंदिरों एवं उनके विग्रहों की उपासना का शास्त्रीय मर्यादाओं के साथ निर्वाह करते रहे लोगों को ही देवताओं के अतिक्रमण का अपराधी करार देना काशी की धार्मिक परंपरा का अपमान है।”

अजय राय ने आरोप लगाया कि इससे काशी की धार्मिक आस्था कि पूजित रही प्रशस्त विरासत लांछित हुई है। वे सभी भवन इस सनातन नगरी की परम्परा से उसी स्वरूप में रहे, जिन्हें प्रधानमंत्री ने परोक्ष रूप से अतिक्रमण के अपराध का अखाड़ा बताकर काशी को अनावश्यक लांछित करते हुये, काशी की प्रशस्त धरोहरों के अशास्त्रीय धवस्तीकरण का औचित्य सिद्ध करने की एक अमर्यादित कोशिश की है।

अजय राय ने कॉरिडोर पर सवाल उठाते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ क्षेत्र में व्यापक धवस्तीकरण और नवनिर्माण की समूची योजना पर आपत्ति इसीलिए है क्योंकि यआ योजना जन विश्वास संजोने की जिम्मेदारी की अपेक्षा करते हुये सत्ता के दंभ से भरी अधिनायक शैली में बनाई एवं क्रियान्वित की गई है। यदि और किसी ने ऐसा किया होता तो भाजपा तूफान खड़ा कर देती।

अजय राय ने कहा कि जिस अहिल्याबाई की दुहाई प्रधानमंत्री ने दी है, उन्होंने तो वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण के समय कुछ भी और यहां तक मंदिर की परिवर्तित पुरानी संरचना तक को अपनी सक्षम सामर्थ्य के बावजूद ध्वस्त किये बिना निर्माण की यशस्वी भूमिका निभाई और उससे पूर्व चुनार किले में काशी की विद्वत पंडित सभा बुलाकर शास्त्रीय विमर्श प्राप्त किया था।

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