नारस। ‘सोने की कटोरिया में हल्दी तेल ले आवा हो’ के मंगल गीत के बीच रंगभरी एकदशी पर्व से पूर्व बाबा विश्वनाथ के गौने की मंगल क्रियाएं सोमवार से शुरू हो गई। सोमवार को फाल्गुन शुक्ल की पंचमी को माता गौरा की रजत प्रतिमा पर हल्दी और तेल चढ़कर उनका विशेष श्रृंगार कर बाबा विश्वनाथ के गौने की मंगल क्रिया का शुभारम्भ हुआ। लोक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्री पर शिव विवाह के पश्चात भगवान शंकर रंगभरी (अमलका एकादशी ) पर माता गौरा का गौना कराकर कैलाश लाये थे।

यह मांगलिक कार्यक्रम मंदिर के महंत डॉ कुलपति तिवारी के आवास पर दोपहर बाद शुरू हुआ। महिलाओं के मंगल गीत से कुलपति तिवारी का आवास चहक उठा था।

इस सम्बन्ध में डॉ कुलपति तिवारी ने बताया कि पंरपरानुसार रंगभरी एकादशी के पूर्व सोमवार को दोपहर से ही माता की रजत प्रतिमा का अनुष्ठान शुरू हो गया। वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोचार कर माता की प्रतिमा का विधि विधान से पुजन कर पंचगव्य, पंचद्रव्य, दुध, गंगाजल से स्नान करा कर रजत सिंहासन पर विराजमान कराकर विशेष श्रृंगार किया गया।

उन्होंने बताया कि परंपरनुसार सांयकाल 5 बजे माता की प्रतिमा को महिला श्रद्धालुओं ने हल्दी तेल लगाकर अंखड सौभाग्य का वर माँगा। इस दौरान माता पार्वती को ठंडई, पंचमेवा व मिष्ठान का भोग लगाकर मंहत डॉ कुलपति तिवारी विशेष महाआरती कर हल्दी तेल की परंपरा संपन्न कराया। शिवरात्री पर विवाह की रस्म के बाद रंगभरी एकादशी पर रजत पालकी पर माता गौरा संग पालकी निकाल गौना की रस्म होगी।