नारस। बॉलीवुड में कई सारी फिल्‍में धाकड़ गर्ल्स और जांबाज़ लड़कियों के ऊपर बनी हैं। वहीं वाराणसी जिले में भी एक ऐसी पुलिस अधिकारी हैं, जिसके धाकड़ व्‍यक्तित्व से अच्छे-अच्छे अपराधी पनाह मांगते हैं।

जनता की सेवा करने का जज्‍बा ऐसा कि बिहार पीसीएस परीक्षा क्‍वालिफाई करके लेबर कमिश्‍नर की आरामदायक नौकरी को त्‍यागकर अंकिता सिंह ने पुलिस सेवा जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यक्षेत्र में उतरने का मन बनाया। अंकिता सिंह फिलहाल यूपी पुलिस में डिप्‍टी एसपी के पद पर वाराणसी के चेतगंज इलाके की क्षेत्राधिकारी हैं।

Live VNS ने आईजीआरएस रैंकिंग में प्रदेश में लगातार सर्वश्रेष्‍ठ रहने वाली डिप्‍टी एसपी अंकिता सिंह से उनके जीवन कि विभिन्‍न पहलुओं पर बात की है।

लड़कियों की रोल मॉडल अंकिता सिंह
मौजूदा समय में सीओ चेतगंज डिप्टी एसपी अंकिता सिंह वाराणसी पुलिस का वो चमकता हुआ सितारा है, जिसकी रौशनी में अपराधियों की हर हरकत पर नज़र रखी जा रही है। कानपुर का ज्योति हत्याकांड हो या वाराणसी में एसीएसटी लड़की की आनर किलिंग का केस इस जाबाज़ महिला आफिसर ने 48 से 72 घंटों में सभी मामलों का सफल अनावरण कर महिलाओं की काबिलियत पर मुहर लगाईं। इसके अलावा वाराणसी के लहरतारा में हुए सिलेंडर ब्‍लास्‍ट के मामले अंकिता सिंह की जांबाजी की तस्‍वीर जब मीडिया में वायरल हुई तो वाराणसी की कई लड़कियों ने उन्‍हें अपना रोल मॉडल मानते हुए पुलिस सेवा में जाने की इच्‍छा जतायी।

एक साथ तीन परीक्षाओं को किया क्वालीफाई
देवरिया ज़िले की रहने वाली वाराणसी की चेतगंज सीओ अंकिता सिंह से ने हमें बताया कि उन्होंने हाईस्कूल की शिक्षा के बाद गोरखपुर से पोस्‍टग्रेजुएशन किया। इसके बाद इलाहाबाद आ गयीं और पूरे जी-जान से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गयीं। इसी दौरान 2007 में उनका चयन एक ही बार में बिहार पीसीएस में एक्ससाइज़ डिपार्टमेंट और यूपी पुलिस में डिप्‍टी एसपी के पद पर हो गया। इसके बाद 2009 में भी असिस्टेंट लेबर कमिश्नर के पद पर चयन हुआ पर उन्‍होंने पुलिस को ही अपना करियर बनाया।

पिता की प्रेरणा से बनीं पुलिस अफसर
2007 बैच की डिप्टी एसपी अंकिता सिंह से जब हमने पूछा कि पुलिस सेवा में आने की मुख्य वजह क्या थी, तो उन्होंने अतीत के झरोखे में झांकते हुए अपने पिता डिप्टी एसपी कृष्ण सिंह बघेल के एक वाक्य को दोहराया। अंकिता सिंह ने कहा, ”पापा जी कहा करते थे कि यदि समाज की सच्ची सेवा करनी है तो या तो डॉक्टर बन जाओ या फिर पुलिस ज्‍वाइन कर लो। क्योंकि, डाक्टर के पास आदमी शारीरिक रूप से बीमार आता है, जिसका वो इलाज करता है और पुलिस के पास आदमी लुटा-पिटा आता है। इन दोनों जगह सेवा का भरपूर मौका है।” अंकिता सिंह ने बताया कि बचपन से घर में पुलिस का जो माहौल मिला था, उसे देखते हुए भी मेरे मन में कहीं न कहीं खाकी वर्दी पहनने का जज़्बा शुरू से ही रहा।

कानपुर के ज्योति मर्डर केस ने बहुत कुछ सिखाया
अंकिता सिंह ने बताया कि 27 जुलाई 2014 को कानपुर के बिस्कुट व्यापारी की पुत्रवधु ज्योति श्यामदासानी की ह्त्या चाकुओं से गोदकर कर दी गई थी। घटना से कुछ देर पहले उसका अपहरण किया गया था जब वो अपने पति के साथ घर जा रही थी। सीओ अंकिता सिंह ने बताया कि इस दौरान उनकी पोस्टिंग कानपुर में थी और उन्हें इस ह्त्या के खुलासे की जिम्‍मेदारी दी गयी थी। क्योंकि मामला हाईप्रोफाइल था और अपहरण के कुछ देर बाद उसकी डेड बॉडी मिली थी जिसे चाकुओं से गोदा गया था।

पति ने लिखवाई अपहरण की रिपोर्ट
सीओ अंकिता सिंह ने बताया कि शुरू शुरू में ज्योति मर्डर एक मिस्ट्री की तरह लग रही थी, क्योंकि उसके बदन पर चाकू से गोदने के 17 निशान मिले थे। जैसा कि अक्‍सर होता है, अपराध के कारणों का पता लगाने के लिये आपको अपराधी की मेंटलिटी में जाना होता है। अंकिता सिंह ने भी इसी फार्म्‍यूले को अपनाया। पहली बार मिले इस चुनौती भरे टास्‍क को अंजाम तक पहुंचाने के लिये अंकिता सिंह ने घटना के सभी पहलुओं की बारीकी से तहकीकात शुरू की। जांच शुरू की गयी तो ज्योति के पति द्वारा एक नंबर पर उसी दिन 600 से अधिक मैसेज करने की बात सामने आयी। इसके बाद परत दर घटना की गुत्‍थी खुलती गयी और सिर्फ 48 घंटे में हमने ज्‍योति मर्डर केस सभी आरोपियों के साथ-साथ मुख्य साजिशकर्ता उसके पति पीयूष भी पकड़ा लिया।

अफेयर के चक्कर में उतरा था मौत के घाट
अंकिता सिंह ने बताया कि इस चैलेंजिंग टास्क में समाज के कई पहलू सामने आए। ज्योति के पति का उसके ऑफिस में काम करने वाली एक लड़की से अफेयर था, ये बात ज्योति को पता चल गई थी इसलिए ये मर्डर हुआ था।

कब परेशान होती हैं अंकिता सिंह
24 घंटे और सातों दिन की चुनौतीपूर्ण पुलिस सेवा में क्‍या अंकिता सिंह को कभी दिक्‍कतों का भी सामना करना पड़ता है? हमारे इस सवाल पर उन्‍होंने किसी आम महिला की तरह ही मुस्‍कुराते हुए जवाब दिया कि वैसे तो इस चैंलेंजिग जॉब को मैंने खुद ही चुना है और ये मुझे बेहद पसंद है इसलिये रोजमर्रा की चुनौतियों से मैं घबराती नहीं हूं। साथ ही हमारी ट्रेनिंग ऐसी होती है कि हमें बड़ी से बड़ी चुनौतियों में भी धैर्य न खोने का साहस आ ही जाता है। फिर भी थोड़ी परेशानी तब महसूस होती है जब परिवार में कोई परेशानी में होता है। जैसे अगर मेरे बेटे को बुखार होने पर भी मुझे किसी मीटिंग को अटैंड करना होता है तो एक मां के तौर पर थोड़ी तकलीफ होती है, जो स्‍वाभाविक है। बावजूद इसके मैं अपने दायित्‍वों के निर्वहन से कभी पीछे नहीं हटती।

पति भी हैं पुलिस अफसर
अंकिता सिंह के पति अखिलेश सिंह भी एक पुलिस अधिकारी हैं। वे वाराणसी जनपद में सीओ के पद पर रह चुके हैं। उन्होंने चेतगंज, भेलूपुर और कोतवाली में सीओ पद की जिम्‍मेदारी संभाली है। इस समय अखिलेश सिंह पावर कार्पोरेशन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अखिलेश सिंह और अंकिता सिंह दोनों एक ही बैच के पीपीएस अधिकारी हैं। अंकिता सिंह ने बताया कि मेरे पति मुझे हर कदम मदद करते हैं।

जहां भी हैं, वहां अपना बेस्ट दें
सीओ चेतगंज अंकिता सिंह ने वाराणसी की लड़कियों और महिलाओं को सन्देश देते हुए कहा कि वे मज़बूत बनें। आगे बढ़ें और परिवार और समाज में अपना योगदान दें। अंकिता सिंह के अनुसार, ”मैं ये नहीं कहती की आप किसी जॉब में हों तभी सर्वोत्तम दें, आप जहाँ हो चाहे ऑफिस या घर हर जगह आप अपना बेस्ट दें समाज के बंधनों के बावजूद।”