नारस। कहतें हैं हुनर किसी का मोहताज नहीं होता और उसे जब परवाज़ मिलती है तो दुनिया सलाम करती है। ऐसा ही एक हुनरबाज़ इस समय वाराणसी में चर्चा में है। शहर के अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एन्ड मैनेजमेंट के मेकेनिकल सेकेण्ड ईयर के छात्र विशाल पटेल ने महज़ 4 हज़ार की लागत से एक ऐसी इंटेलिजेंट मशीन गन तैयार की है, जो सीज़फायर के समय जवानों की रक्षा करेगी।

अगर दुश्मन आया सामने तो गयी जान
इस संबंध में बात करते हुए विशाल पटेल ने बताया कि अपने जवानों को पहचानने वाली इस गन की विशेषता ये हैं कि इस गन के सामने अपना कोई जवान आ जाये तो यह गन उन्‍हें पहचान लेता है और अपने ट्रिगर को लॉक कर देता है। मगर, सामने कोई दुश्मन है तो ये फायरिंग शुरू कर देता है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से सेना के कैंपों की सुरक्षा के साथ हमारे देश के जवान सुरक्षित रहकर दुश्मनों का सामना कर सकेंगे जिससे हमारे देश के जवानों के जान माल की रक्षा होगी और हमारे देश व जवानों की मारक छमता और भी मजबूत होगी।

देश के जवानों की रक्षा की गन
विशाल ने बताया कि इसे बनाने का विचार पुलवामा में हुए जवानों पर आतंकी हमले के बाद आया, कि क्यों न हम अपने जवानों की सुरक्षा के लिए कुछ करें, जिससे हमारे देश के जवान सुरक्षित रह कर दुश्मनों और आतंकियों का सामना कर सकें। हमने अपनी सोच के आधार पर इसका वर्किंग मॉडल बनाया है। इसे बनाने का हमारा उद्देश्य अपने देश व जवानों सुरक्षा हैं।

मोशन सेंसर पर बेस्ड है ये गन
विशाल पांडेय ने बताया कि इसमें हमने मोशन सेंसर का इस्तेमाल किया है, जो अपनी तरफ बढ़ते दुश्मनों को देखते ही हमारे कंट्रोल रूम को अलर्ट कर देता है। इस सेंसर की क्षमता अभी 20 से 25 मीटर है। दूसरा है ट्रांसमीटर सिस्टम, जिसकी सहायता से ये मशीन गन अपने जवानों को पहचान सकतीं है। इस मशीन गन के सामने अगर कोई दुश्मन आ जाए तो यह मशीन गन उसपर गोलियों की बौछार शुरू कर देता है। यदि अपना कोई जवान इसके रेंज में आ जाए तो ये उन्हें अपने सिग्नल के माध्यम से पहचान लेता है। अपने ट्रिगर को लॉक कर देता है, मॉडल में इसकी मारक छमता 100, मीटर है इस प्रोटोटाइप मॉडल में 6 बैरल है।

कबाड़ के ये सामान भी हैं इस गन के अंग
इस इंटेलिजेंट मशीन गन में डिश टीवी बॉक्स को ट्रिगर के लिए इस्तेमाल किया है। इसके अलावा पेयर सेंसर,जिसके सामने अगर कोई एक्टविटी होता है तो सर्किट शुरू हो जाता है। ये गन में लगा होगा, स्टील ड्रम को सामने बचाव के लिए लगाया गया है यह मैनुअल में बचाव करेगा।

सरकार करे प्रोत्साहित
अशोका इंस्टीयूट ऑफ इंजीनियरिंग एन्ड मैनेजमेंट के रिसर्च एन्ड डेवलेपमेंट हेड श्याम चौरसिया ने बताया कि विशाल ने यह मॉडल स्टार्टअप इंडिया के तहत बनाया है और बीएचयू के प्रोफेसरों ने इस आविष्कार की सराहना भी की है। पर छोटे शहर से होने की वजह से वाराणसी के कई अन्य प्रयोगों की तरह हो सकता है ये प्रयोग भी यहीं खत्म हो जाए। सरकारों से यही मांग है कि ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करें जो देश के लिए कुछ करना चाहते हैं।