नारस। 17वीं लोकसभा के लिये आम चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है। इसके साथ ही सोशल मीडिया के धुरंधर अपने-अपने पसंदीदा कैंडिडेट्स और अपनी पार्टी के वर्चस्व के लिये पोस्‍ट, फोटो और वीडियो की जंग में उतर चुके हैं। अगर आप भी ऐसा ही कुछ कर रहे हैं तो सवधान हो जाइए। जी हां, चुनाव आयोग की पैनी नजर इस बार प्रत्‍याशियों के साथ-साथ सोशल मीडिया यूजर्स पर भी है।

इस सम्बन्ध में Live VNS ने वाराणसी के डीएम व जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह से बातचीत की है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भारत निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया पर नज़र रखने के लिए एक कमेटी बनायी है। यदि, किसी ने भी इस कमेटी के नियमों का उल्लंघन किया तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश आयोग की ओर से दे दिये गये हैं।

मीडिया सर्टिफिकेशन एन्ड मॉनिटरिंग कमेटी का गठन
जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेन्‍द्र सिंह ने वाराणसी लोकसभा सीट की जनता से अनुरोध करते हुए कहा है कि इस बार सोशल मीडिया पर चूंकि विशेष नज़र रखी जा रही है, इसलिए फेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब, वाट्सएप, ब्‍लॉग, वेब पोर्टल आदि पर कुछ भी ऐसा पोस्‍ट ना करें, जिससे आपको कानूनी कार्रवाई के दायरे में आना पड़ जाए। उन्‍होंने बताया कि भारत निर्वचन आयोग ने इस बार सोशल मीडिया पर नज़र रखने के लिए मीडिया सर्टिफिकेशन एन्ड मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया है।

मीडिया एक्सपर्ट कर रहे हैं अपना काम
जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेन्‍द्र सिंह ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश पर हमने वाराणसी में भी मीडिया सर्टिफिकेशन एन्ड मॉनिटरिंग कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें एक सोशल मीडिया एक्सपर्ट को नामित किया गया है। इसके अलावा वाराणसी पुलिस की सोशल मीडिया सेल भी विभिन्‍न साइट्स पर होने वाली पोस्ट पर विशेष नज़र रख रही है।

भूलकर भी पोस्‍ट और वायरल ना करें ऐसे मैसेज
जिला निर्वाचन अधिकारी ने वाराणसी लोकसभा की पब्‍लिक से अनुरोध करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर कोई ऐसा वक्तव्य, पोस्टर, बैनर और वीडियो ना डालें, जिससे दो समुदायों के बीच उन्माद पैदा हो। इसके अलावा किसी भी कीमत पर धर्म या जाति के नाम पर वोट मांगने वाली बात का वीडियो, फोटो या कोई स्टेटमेंट किसी भी सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म पर हर्गिज सर्कुलेट न करें।

जुड़ेगा कैंडिडेट के चुनाव खर्च में
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि चुनाव आते ही सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार की बाढ़ आ जाती है। इसबार चुनाव आयोग इसे लेकर काफी सख्त है। उन्‍होंने जनता से अपील किया कि चुनाव में उतरने वाले कैंडिडेट की अनुमति के बगैर उसके पक्ष में कोई प्रचार-प्रसार या पोस्‍ट न करें। अगर ऐसा किया जाता है तो उसे पोलिटिकल प्रचार-प्रसार के दायरे में माना जाएगा और इसे राजनीतिक दल के उम्‍मीदवार के चुनावी खर्च में शामिल किया जा सकता है।

कैंडिडेट्स को भी लेना होगा परमिशन
जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जो भी कैंडिडेट और पार्टियां सोशल मीडिया के माध्यम से अपना प्रचार आडियो-वीडियो या अन्‍य किसी भी माध्यम में करना चाहती हैं, उसके लिए उन्हें मीडिया सर्टिफिकेशन एन्ड मॉनिटरिंग कमेटी से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही वे अपना प्रचार-प्रसार सोशल मीडया पर चला सकते हैं।

नहीं माने तो जाएंगे जेल
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि लोग अगर ये सोचते हैं कि हम सोशल मीडिया पर कुछ भी डाल देंगे, कुछ भी चला देंगे और किसी को पता नहीं चलेगा, कोई कार्रवाई नहीं होगी, तो मेरा आप सब से ये अनुरोध है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी बात करता है, जिससे लॉ एन्ड ऑर्डर प्रभावित हो सकता है या साम्‍प्रदायिक उन्‍माद फैल सकता है, या फिर किसी कैंडिडेट की पर्सनल लाइफ पर अटैक किया गया हो, तो ऐसे कैम्‍पेन पर हम पूरी कड़ाई के साथ निपटेंगे।

हालांकि…
जिला निर्वाचन अधिकारी ने ये भी जोड़ा कि अगर किसी प्रत्‍याशी की आलोचना करनी भी है तो उसके कार्यों की करें, उसके एजेंडा को लेकर करें, मगर किसी भी सूरत में प्रत्‍याशी के पर्सनल लाइफ को लेकर पोस्‍ट नहीं किया जा सकता। यदि कोई ऐसा करेगा तो उसे चिह्नित करके चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कड़ी धाराओं में उन्‍हें जेल भेजा जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्‍पष्‍ट किया कि ये गाइडलाइन्‍स सिर्फ लोकल स्तर यानी केवल बनारस के लिये ही नहीं हैं, बल्‍कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से देश की सभी 543 लोकसभा क्षेत्रों में इसे कड़ाई से लागू किया जा रहा है।