नारस। 17 मार्च को काशी में होली का पहला पर्व रंगभरी एकदशी मनाया जाएगा। इस दिन 354 साल पुरानी परम्परा के अनुसार बाबा विश्वनाथ गौरा का गौना कराने आएंगे। इस बार बाबा विश्वनाथ की यह गौना बरात बहुत ख़ास होने जा रही है। इस वर्ष जहां बाबा विश्वनाथ के मस्तक पर राजस्थानी टोपी शोभित होगी तो तन पर गुजरात के खादी वस्त्र। रंगभरी एकदशी से पहले मंदिर के महंत डॉ कुलपति तिवारी के घर माता गौरा के गौना के मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं।

रंगभरी एकदशी के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर की तरफ से तैयारियां ज़ोरों पर हैं क्योंकि इस दिन बाबा विश्वनाथ होली खेलते हैं और शुरू हो जाता है काशी का होरियाना माहौल। इस बार यह एकदशी कुछ खास होने जा रही है। इस सम्बन्ध में मंदिर के महंत कुलपति तिवारी ने बताया कि इस बार बाबा विश्वनाथ गौना कराने के समय राजस्थान की लाल पगड़ी अपने मस्तक पर सजाएंगे और गुजरात के ख़ास खादी के परिधान से उन्हें सजाया जाएगा। इसके अलावा माता गौरा को भी केसरिया रंग की बनारसी साड़ी से सजाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि रंगभरी एकादशी उत्सव में बधाई गीतों और वैदिक मंत्रों के बीच गौने का शगुन चढ़ेगा तो गौना लेने ससुराल पहुंचे दामाद के स्वागत की रस्म निभाई जाएगी। 108 डमरूओं की थाप, शंखनाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन को भव्यता प्रदान करेंगे। महंत डा. कुलपति तिवारी के अनुसार गौना बारात के समय चल रजत प्रतिमाओं के साथ भक्तों पर उड़ाई जाने वाली फूलों से तैयार अबीर में इस बार चंदन का चूर्ण मिलाया जाएगा।

डॉ कुलपति तिवारी ने बताया कि इस बार फूल-पत्तियों से बनी हर्बल अबीर मथुरा से मंगाई गई है। इसे गुलाल की जगह उपयोग किया जाएगा। साथ 354 वर्षो से निकलने वाली बाबा विश्वनाथ की रजत प्रतिमा और पालकी यात्रा मे होने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम शिवांजलि इस बार राष्ट्र वीरों को समर्पित रहेगा।