नारस। 25 जनवरी को घोषित हुए पद्म सम्मानों में काशी की दो संगीत विभूतियों का नाम सुन काशी गीत संगीत मई हो गई थी। इन्ही दो विभूतियों पंडित राजेश्वर आचार्य और बिरहा सम्राट हीरालाल यादव को राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्मश्री सम्मान समारोह में पद्मश्री एवार्ड से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने के बाद पंडित राजेश्वर आचार्य ने इस सम्मान को काशी का सम्मान बताया तो हीरालाल यादव ने इसे लोक कलाओं का सम्मान बताया।

पंडित राजेश्वर आचार्य

बाबा विश्वनाथ को किया समर्पित

काशी की ध्रुपद गायिकी और जलतरंग वादन में महारथ प्राप्त विख्यात संगीतकार डॉ राजेश्वर आचार्य को पद्मश्री एवार्ड से आज सम्मानित किया गया। संगीत के पुरोधा पंडित राजेश्वर आचार्य काशी के भदैनी क्षेत्र के रहने वाले हैं। पद्मश्री एवार्ड से नवाज़े जाने के बाद उन्होंने इस सम्मान को काशी का सम्मान बताया और इसे बाबा विश्वनाथ को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और वो काशी के संगीत के और करीब आएंगे। ध्रुपद जैसी विधा विलुप्त हो रही है ऐसे सम्मानों से उसे बचाया जा सकता है। क्योंकि इनसे संगीतकार प्रोत्साहित होते हैं।

लोक गायिकी को मिलेगा नया आयाम

इसके अलावा काशी के संगीत के पुरोधा और बिरहा गायिकी के बादशाह हीरालाल यादव को भी पद्मश्री सम्मान से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया। काफी दिनों से अस्वस्थ्य चल रहे हीरालाल यादव राष्ट्रपति भवन व्हीलचेयर पर पहुंचे थे। हीरालाल वो हस्ती हैं जिनके अपनेपन का हर शख्स कायल है। इनके कंठ में वो मधुरता है कि एक बार जो इन्हें सुन ले वो इनका कायल हुए बिना रह नहीं सकता। काशी रत्न और मंजुश्री से अलंकृत 82 वर्षीय होरी लाल ने सात दशक से ज्यादा समय तक संगीत की सेवा कर दर्जनों लोक गायकों की शिष्य परंपरा तैयार की है।