115वीं जयंती पर खामोश रही उस्ताद की कब्रगाह, अपने शहर ने ही भुला दिया

0
18

नारस। साल 2001 में वाराणसी संगीत घराने के भारत रत्न पाने वाले दूसरे पुरोधा शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 115 जयंती पर लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान में उनकी कब्र पर सन्नाटा पसरा रहा। घर वालो, कुछ करीबियों और पूर्व कांग्रेस विधायक अजय राय के अलावा पूरे प्रशासनिक अमले,गीत प्रेमियों सबने उस्ताद को होली के हुड़दंग में भुला दिया। उस्ताद की कब्र पर उनके चाहने वालों ने उनके हक़ में दुआख्वानी की।

इस मौके पर उस्ताद के घर वालों से जब पूछा गया कि कोई आया नहीं तो पोते आफाक ने कहा ‘अब्बा हुज़ूर के रहने में लोगों की लाईन लगी होती थी और लोग पूरा पूरा दिन उनसे मिलने के लिए घर के सहन में इंतज़ार किया करते थे। उनके जाने के बाद अब लोग उस्ताद की ड्योढ़ी भी भूल गए हैं। कोई उनकी और उनके परिवार की सुध लेने वाला नहीं है।

इस मौके पर कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने भी अपने समर्थकों संग पहुंचकर उस्ताद को खेराजे अकीदत पेश किया। अजय राय ने कहा कि सरकारें आती रहेंगी और जाती रहेंगी पर काशी की ये विभूतियाँ हमेशा अमर रहेंगी। इन्होने काशी का सीना गर्व से ऊंचा किया है। ऐसे में इनकी जयंती पर या इनकी पुण्यतिथि को लेकर राजनीती नहीं होनी चाहिए इन्हे इनका हकमिलना चाहिए और इनके परिवार को इनका हक मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि काशी ने पूरे भारत वर्ष को एक से एक महान व्यक्तित्व, संगीतज्ञ, खिलाड़ी, साहित्यकार आदि रत्न दिये। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां द्वारा संगीत के क्षेत्र में दिए गए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां फाउंडेशन की ओर से आयोजित जयंती समारोह में उस्ताद के बेटे उस्ताद नाजिम हुसैन, अली अब्बास खां, नासिर अब्बास, अब्बास मुर्तजा शम्सी, बेटी जरीना बेगम, अबुल हसन, हादी हसन, अब्बास सिराजी, रजाब अब्बास, प्रमोद वर्मा, अब्बास रिजवी शफक, काबे अली, खां साहब के पौत्र आफाक हैदर आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की।