नारस। कहते हैं कि एक पिता को जितना ज़्यादा उसकी बेटी समझ सकती है उतना एक बेटा नहीं। उसी प्रकार पिता भी बेटियों के ज्यादा करीब होते हैं, लेकिन अक्सर समाज में दुधमुही बच्चियों के साथ हुए ज़ुल्म की कहानी इस बात को झुठलाती दिखाई देती। वहीं बनारस में पिता-पुत्री के प्रगाढ़ रिश्ते की कहानी फिलहाल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

शहर के मच्छोदरी इलाके में रहने वाले शरद केसरी ने अपनी 13 वर्षीय शूटर बेटी के लिए पूरा मकान ही खरीद लिया है, ताकि उसे उसकी प्रेक्टिस में कोई दिक्कत का सामना ना करना पड़े। शरद केसरी की बेटी 10 मीटर एयर पिस्टल (इनडोर गेम्स) की खिलाड़ी है और हाल ही में उसने स्कूली स्पर्धा में गोल्ड पर निशाना लगाया है।

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पिता हैं रायफल क्लब के मेम्बर
इस सम्बन्ध में हमने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएससी) नार्थ क्लस्टर में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीतने वाली समृद्धि केसरी के पिता शरद केसरी से बात की। शरद ने बताया कि मैं एक बिज़नेसमैन हूँ और रायफल क्लब का मेंबर होने का नाते और स्पोर्ट्स में रूचि की वजह से वहां आया जाया करता था। मेरे बच्चे भी वीकेंड पर मेरे साथ होते थे। उसी दौरान समृद्धि ने वहां शूटिंग देखकर मुझसे शूटिंग करने की ज़िद की, तब वह 9 साल की थी।

यूं शुरू हुआ शूटिंग का सफर
उसकी इस ज़िद को पूरा करने के लिए मैंने उसे एयर पिस्टल की ट्रेनिंग दिलाना शुरू कर दिया। पढ़ाई में तेज़ समृद्धि रोज़ रायफल क्लब में ट्रेनिंग को आती थी, पर यह एक इनडोर गेम है और यहां कहीं भी 10 मीटर एयर पिस्टल के लिए इनडोर शूटिंग रेंज नहीं है। अपनी बेटी की इच्छा पूरी करने के लिए मैंने एक मकान खरीदा है, सिगरा इलाके में। जहां 10 मीटर एयर पिस्टल का रेंज बनवाया है। मेरठ से इंजिनियर बुलवाकर। समृद्धि यहाँ रोज़ प्रैक्टिस करती है।

खुश है समृद्धि
समृद्धि केशरी इस बात से खुश हैं की अब बेटियां भी आगे बढ़ रही हैं। समृद्धि ने बताया कि वो अभी 13 साल की हैं और हाल ही में अंडर 14 स्कूल 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीतकर आई हैं। समृद्धि ने बताया कि पापा शरद केसरी के साथ रायफल क्लब जाती थी तो वहां शूटिंग देखकर मनमे आया कि मै भी देखूं कैसे चलती है ये बन्दूक और फिर शुरू हो गया शूटिंग का सफर।

युग भी चाहता है अब शूटिंग
समृद्धि की मां रश्मि केसरी अपनी बेटी की उपलब्धि से काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि हम सब के सपोर्ट से उसके पाप ने उसे आगे बढ़ाने की कोशिश शुरू की और आज वो गोल्ड ले आई है। शूटिंग रेंज के लिए वो सुबह 6 बजे उठ जाती है। योग करने के बाद साइक्लिंग करते हुए सिगरा शूटिंग रेंज तक जाती है और फिर शूटिंग के बाद वापस आकर स्कूल जाती है। उसको देखकर अब उसका छोटा भाई युग भी शूटिंग के लिए कह रहा है जबकि वो क्रिकेट बहुत अच्छा खेलता है।

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