शादी से इंकार पर युवती ने सामने घाट पुल से जान देने का किया प्रयास, राहगीरों ने बचाया 

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नारस। कहते हैं कि ऊपर वाला हर किसी की उम्र तय कर के भेजता है। अगर ऐसा नही होता तो कल्पना काल्पनिक नाम आज इस दुनिया को छोड़ गई होती। ये कहानी है शेरवा मिर्जापुर की रहने वाली कल्पना की जो रामनगर के कुतुलुपुर में अपने मौसा के यहां रह कर सिलाई कढ़ाई का काम सीखती है।

मौसा ने लगाईं फटकार 

काफी दिनों से यहां रहते रहते उसका पड़ोस के ही एक युवक से प्यार हो गया। प्यार इतना परवान चढ़ा कि बात सदा के लिए एक दूजे के होने तकपंहुच  गई। इस पर उसके मौसा ने डांट फटकार लगाई तो वह गुरुवार को अपने पिता को मनाने के लिए शेरवां गांव पंहुच  गई। पिता को डरते सहमते सारी बात बताई तो समझाने की बजाय उसे डांटने लगे।

 पिता ने इंकार किया तो जान देने का किया फैसला 

चूंकि प्रेमी युवक दूसरी बिरादरी का था इसलिए शादी करने से साफ इन्कार कर कल्पना को घर से भगा दिया। इससे खफा हो कर वह जान देने की नीयत से सामने घाट पुल पर पंहुच गई। अभी वह रेलिंग पर चढ़ने का प्रयास कर ही रही थी कुछ राहगीरों की नजर उस पर पड़ गई। उन्होंने उसे पकड़ कर नीचे उतार लिया।

 प्रेमी ने पहचानने से किया इंकार 

पुलिस को सूचना मिलने पर युवती को थाने ले आया गया। यहां फिर कहानी में ट्विस्ट आ गया। जिस युवक से शादी करने की जिद के चलते कल्पना जान देने जा रही थी उसने तो उसे पहचानने से ही इनकार कर दिया।

प्यार तो दूर की बात थी। यह सब देख युवती की आंखों से आंसू निकल गए। मामला एक खास बिरादरी का था तो रसूखदार लोग मामले को रफा दफा करवाने में जुट गए। खबर दिए जाने तक थाने में पंचायत चल रही थी और कल्पना बस सुनी आंखों से आसमान निहारते जा रही थी ये सोचते हुए कि आखिर जाएं तो जाएं कहां।