नारस। बीएचयू के हिंदी विभाग में 29 से 30  मार्च तक दो दिवसीय स्त्री लेखन के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और चुनौतियों को केंद्र में रखकर राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘स्त्री लेखन के आदि हस्ताक्षर’ का आयोजन किया जा रहा है।

कला संकाय के प्रेक्षागृह में इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों और स्त्री लेखन पर कार्य करने वाले विद्वानों द्वारा भारतीय संस्कृति को स्त्री के नजरिये से समझने की कोशिश की जाएगी।

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इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजिका प्रो. चम्पा कुमारी सिंह ने बताया कि स्त्री लेखन और उसकी चिंताओं को लेकर हिंदी  और अन्य भाषाओं में तो बातें खूब होती हैं किन्तु अभी तक उसके लेखन को ऐतिहासिक ढंग से देखने की कोशिश नहीं की गई है।

उन्होंने बताया कि स्त्री लेखन को उसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में उपस्थित चुनौतियों के संदर्भ में देखने, जानने और समझने की यह कोशिश बेहद महत्वपूर्ण है।

इसके साथ उन्होंने कहा कि  इस संगोष्ठी के बहाने स्त्री लेखन के अंतर्विरोधों और ऐतिहासिक चुनौतियों को हिंदी में पहली बार देखने की कोशिश होगी, कहने का मतलब यह है कि स्त्रियों के साहित्य को उनके नज़रिये से देखा जाय तो इक्कीसवीं सदी में समय, समाज और संस्कृति को देखने और समझने की एक नई दृष्टि विकसित हो सकती है।

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