नारस। शुरू से ही योगी आदित्यनाथ अपने भाषणों की ओजस्विता के कारण जाने जाते रहे हैं। किसी भी जनसभा में जोश भर देने वाले योगी आदित्यनाथ को कभी देखने और सुनने वालों की भारी भीड जुट जाया करती थी। मगर मुख्यमंत्री बनने के बाद बीजेपी के स्टार प्रचारक और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का भाषण वाला चार्म कम होता दिखने लगा है।

बनारस में दूसरी बार भी खाली रहीं कुर्सियां
चुनाव आचार संहिता लगने के बाद 26 मार्च को कंटिग मेमोरियल के मैदान में आयोजित विजय संकल्प सभा हो या मंगलवार को सरोजा पैलेस में आयोजित नव मतदाता युवा सम्मलेन, दोनों ही जगह बीजेपी के इस स्टार प्रचारक की चमक का असर नहीं दिखाई दिया। हालत यहां तक रहे कि उनके उद्बोधन के दौरान ही बडी संख्या में कुर्सियां खाली दिखायी दीं।

विज्ञापन

पीछे पसरा था सन्नाटा
हालांकि, बीजेपी कार्यकर्ता आगे आने के लिये की मारा मारी तो कर रहे थे पर एक हज़ार की क्षमता वाले सरोजा पैलेस में पीछे कुर्सियों की कई कतारें किसी के बैठने का इंतज़ार कर रही थीं। मुख्यमंत्री नव मतदाताओं को देश के भविष्य निर्माण के लिए तैयार कर रहे थे और पीछे सन्नाटा था।

तो इसलिये नहीं जुट रही भीड
कुर्सियां खाली होने के संबंध में हमने सरोजा पैलेसे के बाहर इधर-उधर घूम रहे बीजेपी नेताओं से जब सवाल किया तो उन्होंने कहा कि हम लोग यहां आने वाले लोगों के आदर-सत्कार के लिये बाहर घूम रहे हैं और व्यवस्था देख रहे हैं। इसके बाद दूसरी ओर मिले एक परिचित बीजेपी नेता ने नाम न छपने की शर्त पर बताया, ”पहली बात तो ये कि पिछली सभा कोई जनसभा न होकर कार्यकर्ताओं की सभा थी। दूसरी बात ये कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी जी के भाषणों में अब वो मुखरता और ‘आग’ नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएम पद की एक गरिमा और भाषायी सीमा होती है।”

उक्त भाजपा नेता के अनुसार, ”पब्लिक, जो कभी गोरक्षनाथ पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ को ओजस्वी और फायरब्रांड भाषण देते हुए सुनती थी, अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी किस्म के भाषणों के प्रति ज्यादा दीवानी नहीं है। इसके अलावा एक और कारण ये है कि हफ्ते में औसतन एक बार योगी आदित्यनाथ का वाराणसी दौरा हो ही जाता है। तो बनारस की पब्लिक में अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर ज्यादा कौतुलह भी नहीं बचा है।”

 

विज्ञापन
Loading...