नवरात्र के प्रथम दिन माता शैलपुत्री के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

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नारस। चैत्र नवरात्र शुरू हो चुका है। नवरात्र में रोज़ अलग अलग देवी स्वरूपों की पूजा का विधान है। चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री के दर्शन पूजन का विधान है। मां का मंदिर अलईपुर में स्थित है। मां के प्रथम स्वरुप का दर्शन करने के लिए देर रात से ही श्रद्धालू कतारबद्ध रहे। भोर की आरती के बाद दर्शन के लिए मां शैलपुत्री के कपाट खोल दिये गये। मान्यता है कि मां के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि हिमालय के यहां जन्म लेने से मां भगवती को शैलपुत्री कहा गया है। भगवती का वाहन वृषभ है, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल का पुष्प है। इन्‍हें पार्वती स्‍वरूप माना जाता है। ऐसी मान्‍यता है कि देवी के इस रूप ने ही शिव की कठोर तपस्‍या की थी। मां शैलपुत्री के दर्शन मात्र से सभी वैवाहिक कष्ट मिट जाते हैं।

कैंट इलाके की महिला श्रद्धालू ने अमृता चौबे ने बताया कि वो पिछले 10 सालों से मां के दर्शन को आ रही है। उन्होंने मेरी सारी मनोकामनाएँ पूरी की है।

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