मरकर जी उठने वाले भी हैं पीएम मोदी के सामने चुनावी मैदान में

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नारस। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में भले विपक्ष ने किसी कैंडिडेट की घोषणा न की हो लेकिन ऐसे-ऐसे दिलचस्प नाम सामने आए हैं, जो जीते भलें, लेकिन मुद्दों को जरूर हवा दे जायेंगे। ऐसा ही एक नाम है राम अवतार यादव का जो आठ साल तक मृत रहने के बाद जीवित हो उठे। देश भर से कई लोगों ने पीएम मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोंकने की घोषणा की है। उसमें से राम अवतार यादव का मुद्दा बिलकुल अलग है। राम अवतार यादव सरकारी दस्तावेजों में आठ साल तक मरे रहे रहे और बड़ी मशक्कत के बाद अपने आपको सरकारी कागजों में ज़िंदा घोषित करवा पाए।

राम अवतार यादव आजमगढ़ जिले के सगरी ब्लाक के गोराईपटटी गांव के रहने वाले हैं। रामअवतार के रिश्तेदारों ने साल 2005 में एक बीघा जमीन हड़पने के लिए उन्हें सरकारी दस्तावेज में मृत दिखा दिया था। इसके बाद रामअवतार ने खुद को जीवित साबित करने की आठ वर्षों तक लड़ाई लड़ते रहे। रामअवतार ने कागज में अपना नाम वापस तो चढ़वा लिया लेकिन आजतक जमीन पर कब्जा वापस नहीं पा सके हैं। रामअतवार यादव की लड़ाई में लाल बिहारी यादव के मृतक संघ ने बहुत साथ दिया था।

लाल बिहारी यादव को भी 1976 में कुछ रिश्तेदारों ने उनकी जमीन कब्जा करने के लिए सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से उन्हें मृत घोषित करवा दिया था। इसके बाद खुद को जिंदा साबित करने के लिए लाल बिहारी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और विश्वनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव भी लड़ा। तमाम प्रयास करने के बाद आखिरकार 18 साल बाद 30 जून 1994 को सरकारी अभिलेखों में वे एक बार फिर उसे जीवित माना।