नारस। आजकल वाराणसी पुलिस एक के बाद एक गुडवर्क करने में लगी हुई है। इसी गुडवर्क के चक्कर में पब्लिक की सतर्कता को अपना गुडवर्क होने का दावा कर बैठी। सोमवार को जिस अंतरप्रांतीय बाइक चोरों के गैंग को पुलिस ने मीडिया के सामने पेश कर अपना गुडवर्क होने का दावा पेश किया वह दरअसल जनता की सतर्कता और साहस का नतीजा था। मौके पर पहुंची PRV – UP 32 DG 0623 ने उक्त चोर को पकड़ के गाड़ी में बैठा लिया और अपने साथ ले गयी क्योंकि वादी कोई मुकदमा नहीं चाहता था।

शनिवार को जेपी मेहता इंटर कॉलेज के पास एक व्यक्ति बाइक चुराने की कोशिश कर रहा था। वहां मौजूद इलाकाई लोगों ने उसे बाइक चुराते रंगे हाथों पकड़ लिया। पब्लिक ने उस बाइक चोर पर अपना गुस्सा निकालने के बाद उस चोर को 100 नंबर पर सूचना देकर पुलिस के हवाले कर दिया।

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अब वाराणसी पुलिस का दावा सुनिए, पुलिस का दावा है कि जेपी मेहता इंटर कॉलेज के पास से बाइक चोरों को दौड़ाकर पुलिस ने गिरफ्तार किया, वह भी मुखबिर की सूचना पर। इस पूरी गिरफ्तारी में पब्लिक का अहम रोल भी गायब हो गया। वाराणसी पुलिस ने 6 अप्रैल 2019 को पकड़े गए बाइक चोर का कहीं जिक्र न करते हुए अपने प्रेस नोट में 7 अप्रैल 2019 को बाइक चोरों को अरेस्ट होना बताया। पुलिस की थ्योरी की पोल खोलता, 6 अप्रैल को बाइक चोर के पकड़े जाने के समय खबरनवीसों द्वारा बनाया गया वीडियो और पब्लिक का रिएक्शन मौजूद है। ऐसे में हास्यास्पद लगता है कि जहां 6 अप्रैल को एक बाइक चोर पकड़ा जाता है, वहीं दूसरे दिन यानि 7 अप्रैल को दुबारा उसी गैंग के लोग बाइक चोरी करने पहुंच जाते हैं। सोमवार को एसएसपी की प्रेस कांफ्रेंस में उस बाइक चोर को भी पेश किया गया था, जो 6 अप्रैल को बाइक चोरी करते पकड़ा गया था।

यह सही है कि पब्लिक द्वारा पकड़े गए चोर के जरिए ही पुलिस ने पूरे गैंग का पर्दाफाश किया है, लेकिन बाइक चोरी को लेकर वाराणसी पुलिस का दावा एकदम गलत और बेमानी है। क्योंकि बाइक चोर तो एक दिन पहले ही पकड़ा गया था न कि पुलिस के दावे के अनुसार चौकन्ने कैंट एसओ विजय बहादुर सिंह की सतर्कता से।

लेकिन सवाल उठता है कि अगर प्रेस कांफ्रेंस में पेश किए गए बाइक चोर को 6 अप्रैल को पब्लिक ने पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था तो पुलिस उसकी गिरफ्तारी 7 अप्रैल को कैसे दिखा रही है। अगर 6 अप्रैल को पकड़ा गया बाइक चोर 7 अप्रैल को फिर से पुलिस गिरफ्त में आया तो इसका मतलब है कि बाइक चोर पुलिस की गिरफ्त से 6 अप्रैल को ही फरार हो गया और 7 अप्रैल को पुलिस ने उसे दोबारा उसी जगह से उन्हीं कपड़ों में अरेस्ट किया।

पुलिस की कहानी में चन्द्रकान्ता संतति की तरह कई रहस्यमयी झोल हैं जिन्हें शायद वाराणसी पुलिस के आलाधिकारी सुलझा सकते हैं या फिर इस बाइक चोर को हिरासत में लेने वाली कैंट पुलिस

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