बनारस की इस लुप्त हो रही हस्तकला में जान फूंक रही हैं महिलाएं

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नारस। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी पहचान खूबसूरत बनारसी गुलाबी मिनाकरी से भी होती है। वर्षों से इस गुलाबी हस्तशिल्प पर लुप्त होने का संकट आखिरकार अब ख़त्म होता दिख रहा है क्योंकि जिले की महिलाएं अब इससे जुड़ने लगी हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित आईसीटी आधारित ज़री ज़रदोज़ी केंद्र वाराणसी एवं साई इंस्टिट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट वाराणसी तथा समर्पण सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार को महिला उद्यमियों के वर्कशॉप का आयोजन हुआ। विषय था, ”बनारस की गुलाबी मीनाकारी में डिजिटल का प्रयोग”। इस कार्यशाला का शुभारम्भ डीसी हैंडीक्राफ्ट वाराणसी अब्दुल्ला रज़ा ने किया।

पहली बार मिनाकरी में महिलाएं

डीसी हैंडीक्राफ्ट वाराणसी अब्दुल्ला रज़ा कहा कि गुलाबी मीनाकारी के हस्तशिल्प इतिहास में ये पहली बार होगा जब मिनाकरी की शिल्पाकरी महिलाएं भी कर रही हैं। ये काम सदियों से पुरुष करते आ रहे है, पर बनारस की लड़किया पढ़ाई के साथ ये हुनर सिख कर अपना और अपने परिवार की मदद तो कर ही रही है और बनारस की इस अनोखी मीनाकारी को आगे लेकर जा रही हैं।

पूर्वजों का काम अपनाया

इस अवसर पर गुलाबी मीनाकारी के कारीगर एवं कई पुरस्कारों से सम्मानित बलराम दास जी ने कहा कि यह कला काफी मुश्किल है। इसमें कई बार आप का हाथ मीनाकारी के लिए लगाईं जाने वाली परत से जल जाता है क्योंकि उसे गर्म ही लगना होता है। वहीं मीनाकारी सीख रही रौशनी ने बताया कि हमारे पूर्वज इस कला को करते आ रहे थे पर इस काम में कम पैसे होने से वो काम छोड़ चुके हैं पर हम इसे फिर अपना रहे हैं ताकि यह कला नए युग में नए आयाम गढ़ सके।