नवरात्र के छठे दिन चलिए सिंधिया घाट, लीजिए मां कात्यायनी देवी का आशीर्वाद

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नारस। नवरात्री में देवी दर्शन यात्रा में आज छठा रूप मां कात्यायनी का है। मां के इस रूप की पूजा नवरात्री के छठे दिन किया जाता है। धर्म नगरी काशी में माँ का मन्दिर सिंधिया घाट क्षेत्र (संकठा मंदिर) के आत्माविरेश्वर मंदिर के परसिर में स्तिथ है। भोर से ही श्रद्धालू माता के दरबार में आशीर्वाद के लिए उमड़ पड़े हैं। माता कात्यायनी को कुँवारी कन्याएं हल्दी का लेप लगाती है।

माता के इस स्वरुप के बारे में मंदिर के पुजारी महेंद्र नाथ दूबे ने बताया कि मां देवताओ का कार्य सिद्ध करने के लिए महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई इसलिए इनका नाम कात्यायनी देवी पड़ा। कात्यायनी  का ध्यान करने से सांसारिक कष्टों से छुटकारा मिलता है। माँ भय से रक्षा करती है।  मंदिर  के महंत ने बताया कि माँ का यह मंदिर बहुत ही प्राचीन हैं जब काशी आनंदवन हुआ करता था तब से माँ यहां स्थापित हैं।

सुबह से ही मां कात्यायनी देवी के दर्शन को श्रद्धालु माता के दरबार पहुंच रहे थे । श्रद्धा और आस्था लिए मंदिर पर भक्तो के आने का सिलसिला लगातार जारी रहा । धूप, दीप, नैवैद्य, नारियल, पुष्प को मां के चरणों में अर्पित करके भक्त आनंद की अनुभूति कर रहे थे। माता को हल्दी और कुमकुम चढाने से सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है खास तौर से माता को हल्दी और कुमकुम का लेपन करने से कुवारी कन्याओ को मन चाहा वर मिलता है। मन में अपार श्रद्धा लिए आने वाले कुछ भक्त कतारों में लग कर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हुए माता के दरबार पहुंचे और शीश नवा कर सुख शांति आशीर्वाद माँगा ।