नारस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर वाराणसी लोकसभा सीट से उम्मीदवार हैं। साल 2014 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव लड़ने के बाद इस बार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में वाराणसी से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इस चुनाव में अभी किसी भी पार्टी ने प्रधानमंत्री के विरुद्ध अपना प्रत्याशी नहीं उतरा है। वहीं अंदरखाने की खबर की अगर माने तो प्रियंका गांधी यहां प्रधानमंत्री के विरुद्ध ताल ठोक सकती हैं। इस चुनावी समर की सबसे दिलचस्प सीट वाराणसी पर यदि प्रियंका गांधी खड़ी हुई तो यहां का चुनावी रण दिलचस्प होगा।

इस चुनावी रण में प्रियंका गांधी के उतरने के कयासों के बीच Live VNS ने काशी के नेता, शिक्षाविद, पत्रकार और आम इंसान से राय ली। एक तरफ जहां स्थानिय कांग्रेस नेता पीएम मोदी के हारने की भविष्यवाणी कर रहे हैं तो बीजेपी के नेताओं का मानना है कि उनके यहां से लड़ने से मोदी की जीत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। कुछ लोगों की राय यह भी है कि वाराणसी से चुनाव लड़ना प्रियंका गांधी के लिए राजनीतिक आत्महत्या के समान होगा क्योंकि यहां से चुनाव हारने के बाद उनका पॉलिटिकल कैरियर खत्म हो जाएगा।

मोदी के सामने कोई चुनौती नहीं
बीजेपी समर्थक बृजेश चन्द्र पाठक कहते हैं कि यह प्रियंका गांधी के लिए पॉलिटिकल सुसाइड करने जैसा होगा. उनका मानना है कि मोदी के विकास के गुजरात मॉडल को 2014 में लोगों ने केवल सुना था, लेकिन विगत पाँच वर्षों में वाराणसी के विकास में उन्होंने उसे मूर्त रूप में देख लिया है। ऐसे में वाराणासी में मोदी के सामने कोई चुनौती नहीं है।

वाराणसी में पर्यटन के लिए आई हैं प्रियंका
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में समाजशास्त्र के प्रोफेसर सुनील मिश्रा का कहना है कि अबतक प्रियंका गांधी की छवि चुनावों से पहले दिखने वाले एक चेहरे के रूप में ही रही है। उन्होंने कहा कि काशिवासियों की एक परम्परा रही है कि वे पर्यटन के लिए आने वालों को बहुत सम्मान देते हैं, लेकिन उनको यहां स्थायी रूप से बस जाने की स्वीकृति नहीं देते। काशीवासी प्रियंका गांधी को भी एक पर्यटक के रूप में देखते हैं। अभी कुछ दिन पूर्व भी वे एक पर्यटक के रूप में आईं और गंगा किनारे भ्रमण कर चली गईं। काशीवासी वोट देते समय यह जरूर देखेंगे कि उनके समग्र विकास के लिए किसने काम किया। उनके मुताबिक वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय लोकतंत्र में किसी प्रकार का योगदान देने का सामर्थ्य नहीं दिखता प्रियंका गांधी में, ऐसे में उनके चुनाव लड़ने से कोई बहुत बड़ा प्रभाव नहीं पड़ने वाला।

प्रियंका के आने से बढ़ी है ताकत
कांग्रेस नेता राघवेंद्र चौबे ने प्रियंका गांधी के वाराणसी से जीतने की बात कही। उन्होंने कहा कि बनारस का कार्यकर्ता उनके यहां से चुनाव लड़ने को लेकर बहुत उत्साहित है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने केवल वायदे किये हैं लेकिन देश में विकास के नाम पर कुछ नहीं किया, इसलिए काशी की जनता उन्हें सबक जरूर सिखाएगी। उनके मुताबिक प्रियंका गांधी उत्तर भारत मे राजनीति का एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रही हैं। उनका मानना है कि प्रियंका गांधी देश और कांग्रेस का नेतृत्व करने के लिए बहुत तेजी से आगे आ रही हैं। उनके मुताबिक प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस को एक बड़ी ताकत मिली है और ऊर्जा का संचार हुआ है।

पूर्वांचल की 10 सीटों पर पडेगा प्रभाव
वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र त्रिपाठी मानते हैं कि प्रियंका गांधी के आने से पूर्वांचल की कम से कम 10 सीटों पर प्रभाव जरूर पड़ेगा और हो सकता है कि इनमें से कुछ सीट पर इस प्रभाव के चलते जीत भी मिल जाए। लेकिन पुष्पेंद्र वाराणसी में पीएम मोदी के लिए प्रियंका गांधी के लिए बहुत बड़ी चुनौती नहीं मानते।

मोदी को लगाना होगा ज़ोर
सत्ता में बीजेपी की सहयोगी रही सुहेलदेव भारत समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव शशि प्रताप सिंह का मानना है कि प्रियंका गांधी के आने से पीएम मोदी को जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। वे मानते हैं कि सुभासपा के एनडीए गठबंधन से अलग ही जाने के चलते अब कम से कम दो लाख वोट गठबंधन को नहीं मिलेंगे।

गठबंधन की होगी जीत
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष डॉ पीयूष यादव ने यहां से सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार के जीतने की दावा किया। उनके मुताबिक गठबंधन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यहां से कौन चुनाव लड़ता है। उन्होंने कहा कि जल्दी ही गठबंधन के उम्मीदवार की घोषणा होगी और मोदी को हारकर गठबंधन पूरे देश को संदेश देगा।

प्रियंका कर रही गाँधी नाम का दुरुपयोग
बीजेपी काशी क्षेत्र के अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव ने पीएम मोदी के वाराणसी से एक बार फिर जीतने का दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी और उनका परिवार ‘गांधी’ नाम का दुरुपयोग कर रहा है और उन्हें गांधी जी के सिद्धांतों से कोई मतलब नहीं है। उनके पति रॉबर्ट वाड्रा हर तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और ऐसे में यह उम्मीद करना कि वाराणसी की जनता उन्हें पसंद करेगी, यह बिल्कुल असम्भव है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी दलित, शोषित, वंचित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की धारा में जोड़ने का काम कर रहे हैं। ऐसे में वाराणसी में उनके लिए कोई चुनौती नहीं है। उन्होंने दावा किया वाराणसी का जन-जन मोदी का चुनाव खुद लड़ रहा है, इस चुनाव में मोदी पीछे हैं लेकिन खुद जनता उनके लिए आगे है, जब जनता चुनाव लड़ रही है तो उनको जीतने से कोई रोक ही नहीं सकता. इसी के चलते कांग्रेस या विपक्ष अबतक किसी उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर सका है।

विकास के दावों, गठबंधन के समीकरणों के चलते वाराणसी में मतदान से पहले ही चुनाव बेहद दिलचस्प हो चुका है। विपक्ष मोदी के सामने अबतक किसी गम्भीर उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं कर सका है। ऐसे में 19 मई को मतदान के बाद 23 मई को परिणाम की घोषणा ही स्थिति को स्पष्ट कर पाएगी कि मोदी के विकास का मॉडल वाराणसी से विजयी होता है या फिर कांग्रेस और विपक्ष के जातीय समीकरण की रणनीति।

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