साथ में संवाददाता ध्यान चंद शर्मा

नारस। लीची का नाम जुबां पर आते ही मुहं में एक मिठास सी भर जाती हैं। लीची बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर की मशहूर है। इस मशहूर और रसदार फल को अब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में किसानों के आय के साधन के रूप में राजकीय पौधशाला एवं उद्यान कंपनी गार्डन बनाने की तैयारी मे हैं। पिछले 40 साल से इस पौधशाला में पांच लीची के वृक्ष फल दे रहे हैं। इन्ही से पौधे तैयार कर किसानों की आय दोगुनी करने की तैयारी है।

40 साल पुराने वृक्ष दे रहे हैं हर साल लीची
वाराणसी के इन लीची के पेड़ों, किसानों के लिए पैदावार और कैसी जलवायु में होगी अच्छी पैदावार के बारे में Live VNS ने जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता से बात की। उन्होंने बताया कि राजकीय उद्यान परिसर कंपनी गार्डेन में चाइनेन्सिस प्रजाति की लीची के पांच वृक्ष 40 वर्ष पुराने मौजूद हैं। ये हमारे मातृ वृक्ष हैं। हर वर्ष ये पांचों वृक्ष फल देते हैं जिनकी नीलामी कर पैसा सरकारी राजस्व में जमा करा दिया जाता है।

बाज़ार मूल्य में आएगा अंतर
संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि वाराणसी जनपद के किसान लीची की पैदावार शुरू करने के लिए तैयार नहीं हैं और ना ही उनकी इसमें रूचि है, क्योंकि लीची तराई क्षेत्र का फल है और वाराणसी शुष्क है यहाँ चलने वाली पछुआ हवा इसे नुक्सान पहुंचाती है। इससे बचाने के लिए किसानों को इसकी देखभाल करनी होगी, सिंचाई के प्रबंधन से इसकी अच्छी पैदावार बनारस में की जा सकती है। लीची की पैदावार यहां होने लगेगी तो बाज़ार मूल्य में काफी अंतर आएगा।

इस बार 500 पौधे बनाने का लक्ष्य
जिला उद्यान निरीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि हम हर वर्ष इन पांच पेड़ों से अतिरिक्त पौधा बनाते हैं और किसानों को प्रेरित करते हैं पर कोई इन पौधों में रुचि नहीं दिखाता। इस बार व्यापक प्रचार प्रसार के साथ 500 पौधे उचित मूल्य पर किसानों को देने का लक्ष्य है। जिला उद्यान अधिकारी को उम्मीद है कि बनारस के किसान भी लीची की पैदावार में रुचि दिखाएंगे क्योंकि इसमें थोडी सी अतिरिक्त मेहनत करके आय को दोगुना किया जा सकता है।

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