बनारस। एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को पूरा करने के लिए सरकार जमीन-आसमान एक किये हुए तो वहीं बाबा विश्वनाथ के मंदिर का निर्माण करवाने वाली रानी अहिल्याबाई की विरासत की अनदेखी हो रही है।

यह आरोप महारानी अहिल्याबाई स्मृति संरक्षण समिति ने लगाया है। समिति द्वारा इस मसले पर शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंन्स आयोजित की गई। इस अवसर पर मीडिया को सम्बोधित करते हुए विभा मिश्रा ने कहा कि काशी का प्रसिद्ध अहिल्याबाई घाट एवं महल होल्कर राज्य की महारानी की तपस्या स्थली है, इसी भूमि पर सुबह स्मरणिया मां  अहिल्याबाई ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुर्नस्थापना का संकल्प लिया और उसे अपने जीवन में पूरा कर दिया।

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 सरकार पर लगाया आरोप 

प्रेस वार्ता में विभा मिश्रा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भवन संख्या डी 18/ 16 में ऐतिहासिक, धार्मिक एवं वास्तु कि दृस्टि से महत्वपूर्ण है। इसमें मां गंगा की अति दुर्लभ प्राचीन मूर्ति स्थापित है।

यह भवन प्राचीन धरोहर, पुरातत्वीय स्थान तथा अवशेष अधिनियम 24 सन 1958 से संरक्षित है। अब जबकि सरकार के द्वारा काशी के धरोहर की सुरक्षा का युगांतकारी कार्य प्रारम्भ है तथा काशी विश्वनाथ की संरक्षा में सरकार करोड़ो रुपये खर्च कर रही है, ऐसी स्तिथि मे उन्ही महारानी द्वारा बनायी कोठी एवं अन्य मंदिरो की अनदेखी कर देना शासन की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्न है।

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