ई हौ राजा काशी… !! हरिश्‍चंद्र घाट पर आयोजित हुआ भुतहा कवि सम्‍मेलन

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नारस। औघड़दानी भगवान शिव की नगरी काशी, यहां जीवन और मृत्‍यु दोनों में ही उल्‍लास समाया हुआ है। ये दुनिया की शायद अकेली ऐसी नगरी है, जहां मृत्‍यु को शोक का विषय नहीं माना जाता है। महाश्‍मशान कही जाने वाली इस प्राचीन नगरी के लोगों की जीवन शैली में भी आप यहां का अल्‍हड़पन बखूबी महसूस कर सकते हैं। साथ ही यहां होने वाले विविध आयोजनों में भी बनारस की मस्‍ती आपको देखने को मिल जाएगी।

क्‍योंकि ये बनारस है…
रविवार की रात वाराणसी के हरिश्‍चंद्र घाट पर भुतहा कवि सम्‍मेलन का आयोजन किया गया। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये कैसा कवि सम्‍मेलन है। तो भाई साहब ये बनारस है और यहां की मस्‍ती पूरी दुनिया में निराली है। यहां कभी मणिकर्णिका घाट पर चिताओं के बीच तवायफें नृत्‍य करके अपनी मुक्‍ति मांगती हैं, तो कभी हरिश्‍चंद्र घाट पर भूत-प्रेतों को आमंत्रित करता कवि सम्‍मेलन भी आपको यहां के अनूठेपन का अहसास दिलाने के लिये काफी है।

भूतों और नेताओं पर हुईं कविताएं
तो हम बात कर रहे हैं हरिश्‍चंद्र घाट पर आयोजित हुए भुतहा कवि सम्‍मेलन की। ये वही हरिश्‍चंद्र घाट है, जहां कहते हैं कि सतयुग में सत्‍यवादी राजा हरिश्‍चंद्र कल्‍लू डोम के हाथों बेच दिये गये थे। इसी घाट की सीढ़ियों पर रात होते ही ‘भुतहा कवि सम्‍मेलन’ का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने भूत प्रेत को समर्पित कविताओं का पाठ किया। साथ ही नेताओं की भी टांग खींचने में कोई कोताही नहीं बरती गयी।

ओढ़ाये गये कफन, पहनायी गयी नरमुंड की माला
सबसे खास बात ये देखने में आयी कि, जहां आम कवि सम्‍मेलनों में कवियों को शॉल और फूलों की माला पहनाकर स्‍वागत किया जाता है, वहीं इस भुतहा कवि सम्‍मेलन में उन्‍हें बकायदा कफन ओढ़ाया गया और नरमुंडों की प्रतीकात्‍मक मालाएं पहनायी गयीं।

श्‍मशान घाट पर लगे ठहाके
कवि सम्‍मेलन देखने के लिये हरिश्‍चंद्र घाट और आस-पास के क्षेत्र से काफी संख्‍या में लोग शामिल हुए। इसमें महिलाओं की उपस्‍थिति भी अच्‍छी खासी तादात में देखने को मिली। इसके अलावा बच्‍चे भी भूत-प्रेत और बेतालों का मास्‍क पहनकर माहौल को सच में ‘भुतहा’ बनाने की कोशिश करते दिखे। हालांकि, भूतों के इस कवि सम्‍मेलन में भय ने नहीं ठहाके ने बाजी मारी।

चितारूपी मंच पर, भ्रष्‍टाचार का दहन
इस भुतहा कवि सम्‍मेलन के आयोजनकर्ता ‘काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति’ के संरक्षक निधिदेव अग्रवाल ने बताया कि संस्था की ओर से पिछले कई साल से यहां अलग अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। इसी क्रम में पहली बार हरिश्‍चंद्र घाट पर भुतहा कवि सम्‍मेलन किया गया है। निधिदेव अग्रवाल के अनुसार कवि सम्‍मेलन में ‘भूत रूपी’ कवियों के लिये एक बड़ी चिता का मंच बनाया गया था। इसके अलावा देश की सबसे बड़ी समस्‍या भ्रष्‍टाचार की चिता भी तीन तीन चिताएं सजायी गयी थीं। जिन्‍हें आखिरी में दहन करते हुए बाबा मसाननाथ से कामना की गयी कि भ्रष्‍टाचार जैसी बुराई इस देश से सदा सदा के लिये मिट जाए।

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