वाराणसी SSP की पत्नी काम्या कुलकर्णी पेश करेंगी संकट मोचन दरबार में नृत्यांजलि, खुद को बताया सौभाग्यशाली

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नारस। ”गीतं वाद्यं तथा नृत्यं त्रयं संगीतमुच्यते”। नटराज भगवान शिव, संगीत के भी देवता माने जाते हैं। धर्म नगरी काशी, जो खुद भगवान भोलेनाथ की अविमुक्त पुरी कही गयी है, यहां संगीत को लेकर विशेष अनुराग देखने को मिलता है। देश के मशहूर संगीत घरानों में बनारस घराने की प्रतिष्ठा सर्वाधिक है। काशी नगरी में आये दिन गीत, संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां होती रहती हैं। ऐसा ही एक आयोजन है प्रतिष्ठित संकट मोचन संगीत समारोह। संकट मोचन मंदिर प्रांगण में छह दिवसीय इस समारोह के 2019 के संस्करण का शुभारंभ मंगलवार 23 अप्रैल से होने जा रहा है।

काम्या कुलकर्णी भी देंगेी बाबा के दरबार में प्रस्तुति
देशभर के ख्यातिलब्ध संगीत साधकों के लिये इस समारोह में हिस्सा लेने और बजरंगबली के दरबार में गीत, नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देने के लिये होड लगी रहती है। इस बार भी देश के तमाम नामी-गिरामी संगीत उपासक मारुतिनंदन के दरबार में पधारने जा रहे हैं। ऐसी ही एक साधिका हैं काम्या कुलकर्णी, जो बाबा संकट मोचन के दरबार में कथक नृत्य की प्रस्तुति देंगी।

सौभाग्य की बात है जो मुझे मिला बाबा के दरबार में मंच
वाराणसी के वर्तमान एसएसपी (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) आईपीएस आनंद राव सुरेश कुलकर्णी की धर्मपत्नी काम्या कुलकर्णी से Live VNS ने संकट मोचन संगीत समारोह के शुभारंभ से पहले विस्तार से बातचीत की है। काम्या कुलकर्णी ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि उन्हें संकट मोचन संगीत समारोह जैसे प्रतिष्ठित मंच पर बजरंगबली के दरबार में नृत्यांजलि प्रस्तुत करने का सौभाग्य मिल रहा है।

महंत जी से मिलकर की नृत्यांजलि प्रस्तुत करने की इच्छा
काम्या कुलकर्णी के अनुसार, ”काशी दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी है। जब हम काशी नगरी में आये तभी मुझे अपने कथक नृत्य के शौक को परवान चढाने का आशीर्वाद बाबा विश्वनाथ से मिला। रही बता संकट मोचन संगीत समारोह की तो इसके लिये मैंने खुद मंदिर के महंत पंडित विशंभरनाथ मिश्र जी से मुलाकात की और इस प्रतिष्ठित मंच के माध्यम से नृत्यांजलि प्रस्तुत करने की इच्छा व्यक्त की, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। ये मेरे लिये किसी सौभाग्य से कम नहीं है।”

गुरू माता प्रसाद मिश्र के सानिध्य में कर रही तैयारी
काम्या कुलकर्णी ने हमें बताया कि इस बार बजरंगबली के दरबार में श्रीराम स्तुति भक्ति भाव पर वे प्रस्तुति देंगी। इसके लिये वे अपने गुरू माता प्रसाद मिश्र जी के सानिध्य में प्रतिदिन दो से तीन घंटे परिश्रम कर रही हैं। श्रीमती कुलकर्णी के अनुसार कथक नृत्य के बेसिक्स उन्होंने अभिजीत चक्रवर्ती जी से सीखा है।

एमबीए हैं काम्या कुलकर्णी
मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली काम्या कुलकर्णी ने 12वीं तक की शिक्षा लखनऊ में प्राप्त की, इसके बाद बीकॉम की पढाई लेडी श्रीराम कॉलेज से पूरी की है। मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढाई उन्होंने मुम्बई के प्रतिष्ठित आईबीएस संस्थान से हासिल की और आईसीआईसीआई में क्रेडिट मैनेजर के पद पर जॉब करनी शुरू की। काम्या कुलकर्णी की मानें तो कथक को लेकर उनके मन में बचपन से ही लगाव था। चूंकि मायके में मां और पापा पढाई को लेकर ज्यादा फोकस्ड थे तो शुरुआती दिनों में उन्होंने भी पढाई पूरी करने को ही अपना लक्ष्य बनाया, हालांकि लखनऊ की होने के कारण संगती नाटक अकादमी सहित अन्य संगीत साधना केंद्रों में उनका आना-जाना लगा रहा।मगर, शादी के बाद काम्या ने अपने बचपन के शौक को परवान चढाने की कोशिश की जिसमें उनके पति का भी पूरा सहयोग हासिल हुआ।

सीनियर आईपीएस की पत्नियों ने किया प्रेरित
काम्या कुलकर्णी ने बताया, ”शादी के बाद आईपीएस अफसरों की फैमिली में पुलिस वीक के अयोजन के दौरान कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। वहां सेमी क्लासिकल, क्लासिकल नृत्य में मैं पार्टिसिपेट किया करती थी। उसी दौरान सीनियर आईपीएस ऑफिसर्स की पत्नियों ने मुझे कथक करते देखा और प्रोत्साहित किया कि मैं इसकी प्रोफेशनली तैयारी करू तो मैं अच्छा कर सकती हूं। साथ ही पतिदेव ने भी मुझे इसे लेकर काफी प्रोत्साहित किया। परिवार ने भी पूरा साथ दिया। यही कारण था कि जब मैं बनारस आई तो मुझे यहां कलाकारों की संगत मिली और कुछ तो बाबा विश्वनाथ और बजरंगबली की कृपा रही जो मैं पूरी शिद्दत के साथ इस शास्त्रीय नृत्य को सीखती गयीं”

देखें काम्या कुलकर्णी से Live VNS की बातचीत का पूरा वीडियो